Wednesday, February 15, 2012

कांग्रेस ने 2जी मामले में जसवंत को लपेटा

2 जी घोटाले की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मंगलवार को हुई बैठक में कांग्रेसी सदस्यों ने भाजपा पर निशाना साधा। साथ ही सवाल उठाया कि तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने बिना वित्तीय पहलुओं पर विचार किए किस प्रकार 2003 में लाइसेंस शुल्क कम करने के दूरसंचार मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। कांग्रेस ने वित्त मंत्रालय के 25 मार्च 2011 के 2 जी मामले के नोट को अनियमितताओं से भरपूर बताया। आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव आर.गोपालन तीन माह के अंदर मंगलवार को चौथी बार जेपीसी के समक्ष उपस्थित हुए। उनसे वित्त मंत्रालय के 25 मार्च 2011 के नोट के बारे में पूछा गया। नोट में अन्य बातों के बीच यह भी कहा गया था कि वित्त मंत्री के रूप में पी चिदंबरम 2.जी स्पेक्ट्रम की नीलामी पर जोर दे सकते थे। गोपालन ने कहा, जब 2जी नोट तैयार किया जा रहा था तब 15 जून 2007 का नोट वित्त मंत्रालय के पास उपलब्ध नहीं था और यह उससे इतर है। संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में विपक्ष के ज्यादातर सदस्य उपस्थित नहीं थे वहीं कांग्रेस के सदस्यों ने 2 जी नोट के तीसरे पैरा को लेकर सवाल किए और कहा, 2003 में यूएएस के लिए लाइसेंस शुल्क में दो फीसदी की कमी की गई थी। नोट में कहा गया है कि तत्कालीन दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अरूण शौरी द्वारा शुरू प्रस्ताव को तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने वित्तीय पहलुओं की जांच किए बिना 12 दिसंबर 2003 को अनुमति दी थी। वहीं, जेपीसी के अध्यक्ष पीसी चाको ने कहा है कि सुप्रीमकोर्ट द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम के 122 लाइसेंस निरस्त करने के फैसले का जेपीसी के कामकाज पर कोई असर नहीं होगा। उन्होंने कहा, सरकार ने उच्चतम न्यायालय के फैसले की प्रशंसा की है। इसका मूल्य तय करने और दूरसंचार नीति पर भविष्य की सरकारों को सलाह देने के हमारे काम पर कोई असर नहीं होगा। 2जी मामले में चिदंबरम को आरोपी बनाने की सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका अदालत द्वारा खारिज किए जाने संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा,जेपीसी का मामले से कोई लेना देना नहीं है। अदालत द्वारा चिदंबरम को क्लीन चिट मिलने का मतलब क्या उन्हें जेपीसी की ओर से भी क्लीन चिट मिलना है, इस बारे में पूछे जाने पर चाको ने कहा, समिति पर कोई बाहरी फैसला बाध्यकारी नहीं है। चाको ने कहा कि हम उनकी भूमिका की जांच नहीं कर रहे हैं और यह मुद्दा अभी समिति के समक्ष नहीं आया है। उन्होंने कहा, कुछ सदस्यों ने पत्र लिखकर वित्त मंत्री समेत अनेक मंत्रियों को बुलाने के लिए कहा है, लेकिन संसदीय समितियों में मंत्रियों को नहीं बुलाने का एक अलिखित नियम है। मंत्रालय के दस्तावेज सचिव रखते हैं। हमने जो दस्तावेज मांगे हमें सभी मिल रहे हैं।

Tuesday, February 14, 2012

विदेश में भारतीयों का 25 लाख करोड़ काला धन

केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कहा है कि भारतीयों ने 500 अरब अमेरिकी डालर (तकरीबन Rs 24.5 लाख करोड़ ) का अवैध धन विदेशी बैंकों में छिपा रखा है। एक उधर, अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन ग्लोबल फिनांशियल इंटेग्रिटीने भी आकलन किया है कि भारतीयों ने 25 लाख करोड़ रुपए अवैध रूप से विदेशों में छिपा रखे हैं। सीबीआई निदेशक का वक्तव्य इस मायने में अहम है कि पहली बार भारत में प्राधिकार वाले किसी व्यक्ति ने काले धन का एक आकलन पेश किया है जिसे विदेशों में छिपा कर रखा गया है। सीबीआई निदेशक एपी सिंह ने रविवार को यहां भ्रष्टाचार निरोध एवं धन वसूली पर पहले इंटरपोल वैिक कार्यक्र ममें बोले कि स्विस बैंकों में सबसे बड़े धन जमाकर्ता भी कथित रूप से भारतीय ही हैं। सिंह ने विदेशों में छिपाए गए अवैध धन के आकलन का स्रेत इंगित किए बगैर कहा कि मारीशस, स्विट्जरलैंड, लिख्तेनस्तीन, ब्रिटिश वर्जिन द्वीपसमूह इत्यादि कर चोरों की पनाहगाह के रूप में मशहूर जगहों में पहुंचने वाले अवैध धन का सबसे अधिक नुकसान भारत को पहुंचा है। सीबीआई निदेशक ने कहा कि यह आकलन किया गया है कि भारतीयों का करीब 500 अरब डालर अवैध धन ऐसे देशों में जमा है जो कर चोरों की पनाहगाह के रूप में जाने जाते हैं। स्विस बैंकों में सबसे अधिक धन जमा करने वाले भी भारतीय हैं। विदेशों में छिपाए गए भारतीय काले धन के बारे में 500 अरब डालर से ले कर 1500 अरब डालर तक विभिन्न आकलन हैं। जबकि सरकार का कहना है कि किसी अवैध गतिविधि का कोई आधिकारिक आकलन नहीं हो सकता। वह कहती है कि ये आंकड़े गैरप्रमाणित अवधारणाओं पर आधारित हैं। सिंह ने कहा कि कर चोरी की पनाहगाह बने प्रमुख देशों में सूचना देने की राजनीतिक इच्छा की कमी है।

भ्रष्टाचार के लिए सरकार जिम्मेदार

भारतीयों की 25 लाख करोड़ की काली कमाई विदेशी बैंकों में जमा है, जो भारत के सालाना बजट का ढाई गुना है। यह हम नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के लिए बनी नोडल एजेंसी सीबीआइ कह रही है। एजेंसी के निदेशक एपी सिंह का तो यहां तक कहना है कि देश में फैले भ्रष्टाचार के लिए सरकार और उसकी नीतियां जिम्मेदार हैं, क्योंकि यथा राजा तथा प्रजा। सिंह ने यह उद्गार विदेशों में जमा काली कमाई की पहचान और उन्हें वापस लाने के लिए इंटरपोल के ट्रेनिंग कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री वी. नारायणसामी बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। भाजपा ने 1 फरवरी 2011 को जारी अपनी टास्क फोर्स की रिपोर्ट में दावा किया था कि 25 लाख करोड़ की काली कमाई विदेशी बैंकों में जमा है। एक साल बाद सीबीआइ निदेशक ने भाजपा के इस दावे पर अपनी मुहर लगा दी है। एपी सिंह के अनुसार, भारतीयों की अधिकांश काली कमाई मारिशस, स्वीटजरलैंड, लिंचेस्टाइन, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड जैसे टैक्स हैवन देशों में जमा है। इसे वापस लाने की निरंतर कोशिश करनी होगी। सिंह ने देश में फैले भ्रष्टाचार के लिए सरकार और उसकी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। अपारदर्शी, जटिल, केंद्रीकृत और भेदभाव वाली सरकारी नीतियों को भ्रष्टाचार की मुख्य वजह बताते हुए उन्होंने कहा, विकास योजनाओं को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए। प्राचीन भारतीय कहावत यथा राजा, तथा प्रजा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा,जैसा राजा होगा, उसकी प्रजा भी वैसी ही होगी। भ्रष्टाचार और विदेशी बैंकों में जमा काली कमाई में सीधा रिश्ता साबित करते हुए सीबीआइ निदेशक ने कहा, 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, राष्ट्रमंडल खेल घोटाला और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के घोटाले जैसे कुछ अहम मामलों की जांच के दौरान हमने पाया कि घोटालों से की गई काली कमाई पहले दुबई, सिंगापुर या मारीशस गई, वहां से स्विट्जरलैंड और कर चोरों की पनाहगाह माने जाने वाले अन्य देशों में पहुंची। उनके अनुसार, अपराधी कुछ छद्म कंपनियां खोलते हैं और चंद घंटों में एक के बाद एक कई खातों में धन हस्तांतरित कर देते हैं। सीबीआइ को इसका पता लगाने में कई साल लग जाते हैं। एजेंसी को हर हस्तांतरण की जानकारी के लिए अलग-अलग लेटर रेगोटरी (एलआर) भेजना पड़ता है और एलआर की जानकारी देना संबंधित देश की मर्जी पर निर्भर करता है। ज्ञात हो, वैश्विक संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने पिछले दिनों दुनिया के भ्रष्ट देशों की सूची जारी की थी। सार्वजनिक क्षेत्र में फैलै भ्रष्टाचार के बारे में जानकारी और समझ के आधार पर तैयार की गई इस सूची में 10 में 3.1 अंक प्राप्त भारत को 95वां स्थान प्राप्त हुआ था।