Tuesday, February 14, 2012

भ्रष्टाचार के लिए सरकार जिम्मेदार

भारतीयों की 25 लाख करोड़ की काली कमाई विदेशी बैंकों में जमा है, जो भारत के सालाना बजट का ढाई गुना है। यह हम नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के लिए बनी नोडल एजेंसी सीबीआइ कह रही है। एजेंसी के निदेशक एपी सिंह का तो यहां तक कहना है कि देश में फैले भ्रष्टाचार के लिए सरकार और उसकी नीतियां जिम्मेदार हैं, क्योंकि यथा राजा तथा प्रजा। सिंह ने यह उद्गार विदेशों में जमा काली कमाई की पहचान और उन्हें वापस लाने के लिए इंटरपोल के ट्रेनिंग कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री वी. नारायणसामी बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। भाजपा ने 1 फरवरी 2011 को जारी अपनी टास्क फोर्स की रिपोर्ट में दावा किया था कि 25 लाख करोड़ की काली कमाई विदेशी बैंकों में जमा है। एक साल बाद सीबीआइ निदेशक ने भाजपा के इस दावे पर अपनी मुहर लगा दी है। एपी सिंह के अनुसार, भारतीयों की अधिकांश काली कमाई मारिशस, स्वीटजरलैंड, लिंचेस्टाइन, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड जैसे टैक्स हैवन देशों में जमा है। इसे वापस लाने की निरंतर कोशिश करनी होगी। सिंह ने देश में फैले भ्रष्टाचार के लिए सरकार और उसकी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। अपारदर्शी, जटिल, केंद्रीकृत और भेदभाव वाली सरकारी नीतियों को भ्रष्टाचार की मुख्य वजह बताते हुए उन्होंने कहा, विकास योजनाओं को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए। प्राचीन भारतीय कहावत यथा राजा, तथा प्रजा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा,जैसा राजा होगा, उसकी प्रजा भी वैसी ही होगी। भ्रष्टाचार और विदेशी बैंकों में जमा काली कमाई में सीधा रिश्ता साबित करते हुए सीबीआइ निदेशक ने कहा, 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, राष्ट्रमंडल खेल घोटाला और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के घोटाले जैसे कुछ अहम मामलों की जांच के दौरान हमने पाया कि घोटालों से की गई काली कमाई पहले दुबई, सिंगापुर या मारीशस गई, वहां से स्विट्जरलैंड और कर चोरों की पनाहगाह माने जाने वाले अन्य देशों में पहुंची। उनके अनुसार, अपराधी कुछ छद्म कंपनियां खोलते हैं और चंद घंटों में एक के बाद एक कई खातों में धन हस्तांतरित कर देते हैं। सीबीआइ को इसका पता लगाने में कई साल लग जाते हैं। एजेंसी को हर हस्तांतरण की जानकारी के लिए अलग-अलग लेटर रेगोटरी (एलआर) भेजना पड़ता है और एलआर की जानकारी देना संबंधित देश की मर्जी पर निर्भर करता है। ज्ञात हो, वैश्विक संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने पिछले दिनों दुनिया के भ्रष्ट देशों की सूची जारी की थी। सार्वजनिक क्षेत्र में फैलै भ्रष्टाचार के बारे में जानकारी और समझ के आधार पर तैयार की गई इस सूची में 10 में 3.1 अंक प्राप्त भारत को 95वां स्थान प्राप्त हुआ था।

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