Thursday, July 12, 2012

सीबीआई नहीं ढूंढ पाई सबूत

कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने बारापुला ऐलीवेटेड पुल, जो 400 करोड़ की लागत से बना था और 100 करोड़ से ज्यादा के गेम्स विलेज प्रोजेक्ट में क्लोजर रिपोर्ट फाइल करने का निर्णय लिया है क्योंकि सीबीआई को इन प्रोजेक्ट में किक बैक का कोई सबूत नहीं मिल पा रहा है। सीबीआई प्रसार भारती द्वारा ब्रॉडकास्ट मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्णय पहले ही ले चुकी है। सूत्रों के अनुसार कॉमनवेल्थ खेल खत्म होने के बाद सीबीआई ने ताबड़तोड़ मुकदमे दर्ज कर छापेमारी की थी। भारतीय ओलंपिक संघ अध्यक्ष और कामनवेल्थ गेम्स के सव्रेसर्वा सांसद सुरेश कालमाडी सहित कई लोगों को इस सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। मगर सीबीआई को अब कई प्रोजेक्टों में अनियमितता नजर नहीं आ रही है। इसलिए आरोप पत्र दाखिल करने के बदले उसने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने का मन बना लिया है। इन प्रोजेक्टों में एक है बारापुला ऐलीवेटेड पुल। सीबीआई ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 400 करोड़ से ज्यादा की लागत से तैयार बारापुला ऐलीवेटेड रोड में हुई अनियमितताओं को लेकर अप्रैल, 2011 में मुकदमा दर्ज कर दिल्ली और आसपास 10 से ज्यादा जगहों पर छापे मारे थे। छापों में सीबीआई ने कुछ कंप्यूटर और कई महत्त्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए थे। सीबीआई ने शुरुआती जांच में पाया था कि पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की लापरवाही और ठेके दारों से मिलीभगत के कारण बारापुला ऐलीवेटेड रोड की लागत 400 करोड़ पहुंच गई। इससे सरकारी खजाने को करीब एक अरब का नुकसान हुआ है जिसे बचाया जा सकता था। सीबीआई ने जांच में पाया कि इस प्रोजेक्ट की स्वीकृति 2008 में हो गई थी। सीबीआई को जांच में इस बात की हैरानी हुई कि बारापुला ऐलीवेटेड रोड को बनाने के लिए 56 हजार प्रति वर्ग मीटर की लागत आई। यह अनुमानित बजट से कई सौ गुणा ज्यादा थी। सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने दिल्ली सरकार द्वारा कॉमनवेल्थ गेम्स को लेकर नियुक्त विशेष सलाहकार आर नारायणस्वामी की रिपोर्ट की भी गहनता से जांच की जिसमें उसने ठेकेदारों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। मगर अब गहन जांच में कोई ऐसा सबूत नहीं मिल पा रहा है जिसके आधार पर दिल्ली सरकार द्वारा किए गए कायरे को गलत ठहराया जा सके जबकि शुरुआती जांच में अधिकारी और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत के सबूत मिलने के कारण मुकदमा दर्ज किया गया था। मगर अब आरोप पत्र दाखिल करने के बदले उसने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने का मन बना लिया है। इसी तरह गेम्स कवरेज के मामले में भी सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दायर करने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार कॉमनवेल्थ घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने जांच में पाया था कि कॉमनवेल्थ की कवरेज के मामले में 246 करोड़ की अनियमितता हुई। सीबीआई ने जांच में पाया कि कवरेज के लिए प्रसार भारती द्वारा 246 करोड़ का ठेका यूके की कंपनी एसआईएस लाईव को दिया गया। सीबीआई ने जांच में पाया कि बाद में प्रसार भारती द्वारा कवरेज के लिए चयनित कंपनी एसआईएस लाईव ने इस ठेके को लेकर दिल्ली स्थित एक कंपनी को 176 करोड़ में उप ठेके पर दे दिया। मगर सीबीआई को इसमें भी किसी किक बैक के सबूत नहीं मिले। सूत्रों के अनुसार इसी तरह गेम्स विलेज प्रोजेक्ट में भी सीबीआई को कोई अनियमितता नजर नहीं आई। लिहाजा इस मामले में दर्ज पीई को ही बंद करने का निर्णय ले लिया गया है। गेम्स विलेज प्रोजेक्ट में डीडीए ने निजी ठेकेदार को 766 करोड़ का बेल आउट पैकेज दिया। इस निजी कंपनी पर डीडीए द्वारा मेहरबानी के पीछे भी जांच में कोई राज नजर नहीं आया। गौरतलब है कि शुरू में निजी कंपनी को एक हजार करोड़ की लागत से 1168 फ्लैट का ठेका दिया गया।

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