लखनऊ लैकफेड में करीब तीन अरब के घोटाले में मुख्य आरोपी माने जा रहे पूर्व चेयरमैन सुशील कटियार और उसके पीआरओ प्रवीण सिंह जांच एजेंसी कोआपरेटिव सेल (एसआइबी) के हाथ नहीं आये। अब दोनों एसटीएफ को भी चमका दे रहे हैं। एसआइबी ने इनकी अकूत सम्पत्तियों की छानबीन और पड़ताल शुरू कर दी है। एसआइबी पूर्व मुख्य अभियंता गोविंद शरण श्रीवास्तव को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी कर रही है। एसआइबी ने सीमित संसाधनों का हवाला देकर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ की मदद मांगी थी। इसके बाद भी कोई कारगर नतीजा नहीं निकला। सूत्रों के अनुसार अभिसूचना संकलन में इन अभियुक्तों के दिल्ली, लखनऊ व कानपुर में होने का पता चला है। पिछले दिनों जिस समय एसआइबी कानपुर में इनकी तलाश में राज कुशवाहा के घर गयी थी, उसी सुबह कटियार तो कुशवाहा के घर गया था। एसआइबी के पहंुचने से पहले ही वह फरार हो गया। एक पूर्व एमडी ने आत्मसमर्पण के लिए अदालत में अर्जी डालने के बाद जांच एजेंसी को खूब छकाया। पूर्व मुख्य अभियंता जीएस श्रीवास्तव व लेखाकार एके अग्रवाल ने अदालती आड़ में पखवारे भर तक खूब आंख मिचौली की है। गुरुवार को जीएस श्रीवास्तव की जमानत खारिज हो गयी। लेकिन अभी तक बाकी अभियुक्तों की गिरफ्तारी न होने के संदर्भ में एसआइबी के महानिदेशक सुब्रत त्रिपाठी का कहना है कि एसआइबी का गिरफ्तारी से ज्यादा जोर अभियुक्तों की प्रापर्टी की छानबीन और गहराई तक मामले की विवेचना करना है। अभियुक्त भी पकड़े जायेंगे।
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