ठ्ठ जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली संप्रग सरकार कोयले से जितना हाथ झाड़ने की कोशिश कर रही है, उसके दामन पर कालिख उतनी ही ज्यादा लगती जा रही है। जब तक सरकार अपने एक मंत्री या नेता को बचाने में ताकत झोंकती है, तब तक कोयले की दलाली में संप्रग के किसी नए नेता का हाथ सामने आ जाता है। सरकार के आला नेता देश भर में घूम-घूमकर कोयला मामले में विपक्ष की साजिश का भंडाफोड़ करने की योजना बना रहे हैं, लेकिन रोज हो रहे खुलासों से उनकी इस मुहिम के लिए मुश्किलें पैदा हो गई हैं। वहीं, सीबीआइ इस मामले में छह और कंपनियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने की तैयारी कर रही है। केंद्र सरकार ऐसा दिखावा कर रही है कि इन आरोपों का कोई आधार नहीं है। यही वजह है कि केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने संप्रग-1 में सहयोगी दल द्रमुक के कोटे से शामिल मंत्री एस जगतरक्षकन के खिलाफ अलग से जांच कराने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। एक दिन पहले ही एक मीडिया रिपोर्ट में राज्यमंत्री रह चुके जगतरक्षकन से संबंधित एक कंपनी को भी कोयला ब्लॉक देने का मामला सामने आया है। खुर्शीद का कहना है, क्यों जांच कराई जाए। पहले ऐसे आरोप तो लगें, जिनकी जांच कराने की जरूरत हो। कोई ठोस सुबूत तो पेश करे कि किसी ने अपने पद का गलत फायदा उठाया। आरोप लगाने के साथ यह भी बताया जाना चाहिए कि कोयला ब्लॉक आवंटन करने वाली स्क्रीनिंग समिति ने गलत तरीके से फैसला किया है। दरअसल, जगतरक्षकन के साथ ही संप्रग-1 के प्रमुख सहयोगी राजद के कोटे से कंपनी मामलों के मंत्री रह चुके प्रेमचंद गुप्ता से जुड़ी एक कंपनी का नाम भी कोयला आवटंन में हुई गड़बड़ी में सामने आ गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रेमचंद गुप्ता के बेटे की स्टील कंपनी को कोयला ब्लॉक दिया गया। इससे पहले पर्यटन मंत्री सुबोधकांत सहाय के भाई की कंपनी को कोयला ब्लॉक देने का मामला उठ चुका है। आरोप है कि सहाय ने इसके लिए पीएम को सिफारिशी पत्र लिखा था। कांग्रेस के एक प्रमुख सांसद विजय दरडा की कंपनी को भी कोयला ब्लॉक देने कामामला उजागर हो चुका है। शुक्रवार को सीबीआइ सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसी एक महीने के भीतर छह और कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज कर सकती है। ये कंपनियां ब्लॉक आवंटन मामले में धोखाधड़ी और तथ्यों को छिपाने के मामले में सीबीआइ की नजर में हैं। सीबीआइ 10 शहरों में 30 जगहों से जुटाए सुबूतों का आकलन कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी सहयोग के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से संपर्क करेगी।

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