Friday, September 14, 2012

पैरवी से आवंटन कराने का काम भाजपा के मुख्यमंत्रियों ने किया




पटना (एजेंसी)। कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दावा किया है कि प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के बदले भाजपा के मुख्यमंत्रियों ने ही पत्र लिखकर खदान के लिए दूसरों की पैरवी थी। सिंधिया ने संवाददाताओं से कहा कि पूर्ववर्ती राजग के सरकार में कोल ब्लॉक आवंटन केवल पत्र लिखकर मनमाने ढंग से होता था। लेकिन संप्रग सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के माध्यम से प्रक्रि या शुरू की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका विरोध भाजपाशासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने किया और पत्र लिखकर कोल आवंटन के लिए पैरवी की। भाजपा के कार्यकाल में 37 आवंटन बिना किसी प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के किए गए। उन्होंने कहा कि राजस्व का नुकसान का बहाना बनाकर राजग के कुछ मुख्यमंत्रियों ने प्रतिस्पर्धात्मक निविदा का विरोध किया जबकि सत्ता में आने के बाद संप्रग ने पारदर्शिता बनाई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में भाजपा और राजग के नेता संसद और संसद के बाहर मायाजाल फैला रहे हैं। संप्रग सरकार सत्यता के आधार पर अपने तर्क रखेगी। संप्रग सरकार ने प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के आधार पर आवंटन के लिए कानून मंत्रालय के सुझाव पर खनन एवं खनिज (विकास एवं नियमन) संशोधन विधेयक लाया। इसके पारित होने तक पारदर्शिता बरतने के लिए कोल ब्लॉक आवंटन के लिए एक जांच समिति बनाई। उन्होंने कहा कि जांच समिति का गठन कोल ब्लॉक आवंटन में देरी से बचने के लिए किया गया ताकि ऊर्जा उत्पादन के रास्ते में रोड़ा न आए। सिंधिया ने आरोप लगाया कि राजग द्वारा सिफारिश कर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी अदाणी समूह, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के करीबी अजय संचेती, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रकाश इंडस्ट्रीज और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के करीबी बेल्लारी के रेड्डी बंधुओं को कोयला ब्लॉक आवंटन किए गए। सिंधिया ने कहा कि कोयला के आयात से देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ न पड़े इससे बचने के लिए समिति के माध्यम से आवंटन किए गए। कोल ब्लॉक आवंटन मिलने के बाद काम नहीं शुरू करने पर 58 कंपनियों को कारण बताओ नोटिस दिया गया। 26 के आवंटन रद्द कर दिए गए हैं ।


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