ठ्ठ जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली घरेलू मोर्चे पर भ्रष्टाचार के आरोपों पर घिरी सरकार की फजीहत करने में विदेशी मीडिया भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है। टाइम मैगजीन के प्रधानमंत्री पर सवाल उठाने के बाद एक और अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने संप्रग सरकार पर तीखी टिप्पणी करने में सबको पीछे छोड़ दिया है। इस अखबार ने प्रधानमंत्री को नाकामयाब और असहाय व्यक्तित्व वाला करार देने के साथ संप्रग को भ्रष्ट भी बता दिया है। इससे नाराज केंद्र सरकार ने अमेरिकी अखबार की तीखी आलोचना की। बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से दावा किया गया कि अमेरिकी अखबार ने माफी मांग ली है, लेकिन अखबार ने इस दावे को झुठला कर विवाद और बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री पर अमेरिकी मीडिया की तरफ से जारी हमलों को आगे बढ़ाते हुए वाशिंगटन पोस्ट ने मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संप्रग सरकार को भ्रष्ट करार देते हुए उन्हें इसका निष्प्रभावी व अनिर्णय की स्थिति वाला अगुवा करार दिया है। समाचार पत्र ने मायूस छवि के बन गए हैं भारत के मौन प्रधानमंत्री शीर्षक से प्रकाशित खबर में लिखा है कि मनमोहन सिंह भारत को आधुनिकता, समृद्धि तथा शक्ति के रास्ते पर ले गए, लेकिन आलोचकों का कहना है कि संकोची, मृदुभाषी 79 वर्षीय मनमोहन विफलता की ओर बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में मनमोहन को भारतीय अर्थव्यवस्था का वास्तुकार, अमेरिका के साथ भारत के संबंधों को आगे बढ़ाने वाला तथा दुनिया में सम्मानित व्यक्ति भी बताया गया है। लेकिन उनके मौजूदा कार्यकाल पर तीखी टिप्पणी की गई है। इसमें कहा गया है कि सम्मानित, विनम्र तथा बौद्धिक टेक्नोक्रैट के रूप में उनकी छवि धीरे-धीरे कमजोर होती गई और आज वह भ्रष्टाचार में डूबी सरकार के निष्प्रभावी मुखिया के रूप में नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री को इससे पहले अमेरिका की नामी-गिरामी पत्रिका टाइम ने भी नाकाम (अंडरएचीवर) करार दिया था। जबकि ब्रिटेन के अखबार द इंडिपेंडेंट ने उन्हें कठपुतली बताया था। अब वाशिंगटन पोस्ट ने भ्रष्ट मंत्रियों से घिरे होने और कैबिनेट की बैठकों में प्रधानमंत्री के खामोश रहने पर सवाल उठाकर संप्रग सरकार की परेशानी और बढ़ा दी है। केंद्र सरकार ने अखबार के इस रुख पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। अंबिका सोनी ने अमेरिकी अखबार की टिप्पणी पर अफसोस जताया है। उन्होंने कहा कि पीएम पर ऐसे आरोप लगाना सरासर गलत है। अंबिका ने कहा कि सरकार इस पर विरोध जताएगी। उन्होंने कहा कि पीएम के बारे में पहले भी ऐसा कहा गया था और माफी मांगी गई थी। प्रधानमंत्री के बारे में इस तरह की बात करने का उन्हें कोई हक नहीं है। हैरान पीएमओ ने फजीहत दूर करने की कोशिश में और शर्मिदगी बढ़ा दी। पीएमओ सूत्रों ने दावा किया कि वाशिंगटन पोस्ट ने माफी मांगी है और अगले अंक में इसका खंडन छपेगा। मगर यह खबर आते ही वाशिंगटन पोस्ट में पीएम पर लेख लिखने वाले पत्रकार साइमन डेनियर ने इस दावे को झुठला दिया। डेनियर ने कहा कि वह अपनी रिपोर्ट पर कायम हैं और उन्होंने कोई माफी नहीं मांगी है।
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