Friday, September 14, 2012

चार कोयला ब्लाकों का आवंटन हुआ रद

ठ्ठ जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली करीब महीने भर से सिर्फ कोयला ब्लाक आवंटन घोटाले पर सफाई दे रही सरकार ने गुरुवार को चार कोयला ब्लाकों का आवंटन को रद कर दिया, लेकिन इसमें भी वह राजनीति से बाज नहीं आई। रद होने वाले किसी भी ब्लाक का जिक्र नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में नहीं है। इतना ही नहीं, रद किए गए चार में से तीन ब्लाक राजग सरकार के कार्यकाल के हैं। संप्रग-एक के कार्यकाल में आवंटित सिर्फ एक ब्लाक का आवंटन रद किया गया है। कोयला ब्लाक आवंटन पर बनी अंतर मंत्रालयी समूह (आइएमजी) की सिफारिशों पर अमल करते हुए सरकार ने एक ही कंपनी को मिले तीन कोयला ब्लाकों के लिए जमा बैंक गारंटी की करीब 50 फीसद रकम जब्त करने का फैसला किया है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र की कंपनी मोनेट इस्पात को मिले कोयला ब्लाक के लिए 90 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी भी तलब की है। इस कंपनी को कोयला ब्लाक राजग सरकार ने दिया था। कोयला मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक आइएमजी को कुल 58 कोयला ब्लाकों का आवंटन रद करने या नहीं करने पर फैसला करना है। इनमें से 29 निजी क्षेत्र को आवंटित कोयला ब्लाक हैं। आइएमजी ने अभी सिर्फ आठ ब्लाकों को लेकर अपनी सिफारिशें कोयला मंत्रालय को भेजी हैं। जिन कंपनियों के कोयला ब्लाक रद किए गए हैं, उन्होंने एक दशक बीतने के बावजूद उनसे कोयला निकालने के लिए कोई कदम नहीं उठाए हैं। अधिकारियों का यह भी कहना है कि निजी क्षेत्र को आवंटित अन्य 21 कोयला ब्लाकों के रद होने की संभावना बेहद कम है। जानकारों के मुताबिक रद होने वाला एक कोयला ब्लाक (ब्रह्माडीह) कास्ट्रोन माइनिंग लिमिटेड को वर्ष 1999 में दिया गया था, जबकि फील्डमाइनिंग व इस्पात लिमिटेड को दो कोयला ब्लाक (चिन्होरा और वरोरा) 2003 में दिए गए थे। इन दोनों कंपनियों के कोयला ब्लाकों में कोई प्रगति नहीं हुई है। कंपनियां न तो खनन की योजना बना पाईं और न ही यह बता पाईं कि कोयले का इस्तेमाल कहां किया जाएगा? रद होने वाला सिर्फ एक ब्लाक (लालगढ़, उत्तर) निजी कंपनी डोमको स्मोकलेस फ्यूल्स लिमिटेड को संप्रग-एक के दौरान 2005 में दिया गया था। श्री वीरांगना स्टील को आवंटित तीन कोयला ब्लाक के लिए बैंक गारंटी का एक हिस्सा जब्त करने का फैसला हुआ है।



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