Thursday, September 6, 2012

जब्त होगी कुशवाहा और उसके सहयोगी की संपत्ति

पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा व उसके सहयोगी की राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के धन से कमाई गई करीब 42 करोड़ रु की संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई अब शुरू हो जाएगी। सीबीआई ने इस बावत प्रवर्तन निदेशालय से कहा कि कुशवाहा व सहयोगी की संपत्ति का पता लगा लिया गया है, इसलिए उनकी संपत्ति जब्त की जाए। सीबीआई ने फिलहाल इन लोगों की करीब 42 करोड़ रु की संपत्ति का पता लगाया है जो एनआरएचएम घोटाले से कमाई गई था। प्रवर्तन निदेशालय भी एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रहा है। हाल में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के आला अधिकारियों की बैठक हुई जिसमें सीबीआई ने प्रवर्तन निदेशालय से कहा है कि घोटाले में प्रिवेंसन ऑफ मनी लांड्रिंग का मामला भी बनता है, इसलिए फिलहाल जिस 42 करोड़ की संपत्ति का पता चला है उसको जब्त करने की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू की जाए। उल्लेखनीय है कि सीबीआई को इस मामले में उत्तर प्रदेश के न्यायालय से फटकार भी लगी है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने अपनी जांच में आई मनी ट्रेल की जानकारी भी ईडी को दे दी है। सीबीआई ने कहा कि पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और उसके सहयोगी राम प्रसाद जयसवाल द्वारा एनआरएचएम की 35 करोड़ रु की रकम को विभिन्न रास्तों से अपनी कंपनी और सोसायटी में लगाया गया। सीबीआई ने जांच में पाया कि कैसे एक रुपए के काम को दस रुपए में दिया गया और रकम को दस से अधिक चैनलों द्वारा अपनी कंपनी में लाया गया। सीबीआई ने पाया कि कुशवाहा ने कानपुर स्थित अपने सहयोगी को करोड़ों रुपए दिए। उस सहयोगी ने उस रकम को कानपुर के चार्टर्ड एकांउटेंट को दी। उस एकांउटेंट ने उस रकम को कानपुर और दिल्ली की कंपनियों को दिया। बाद में चेक द्वारा रकम कुशवाहा के ट्रस्ट में दे दी गई। कानपुर स्थित कुशवाहा के सहयोगी ने कुछ रकम शिव कन्या को भी दान किया जिसके निदेशक भी कुशवाहा थे। इसी तरह राम प्रकाश जयसवाल ने पटना स्थित एक एकांउटेंट को नकद रकम दी। उस एकांउटेंट ने कोलकाता के एक चार्टर्ड एकांउटेंट से संपर्क किया और नकद राशि ठिकाने लगाने को कहा। उस एकांउटेंट ने रकम को कोलकाता स्थित कालेधन को सफेद करने वाली कंपनी में निवेश कर दिया। इसके बाद इस कंपनी ने उस रकम को चेक द्वारा जयसवाल और उनके परिवार की कंपनी में दान कर दिया। सीबीआई ने जांच में पाया कि जयसवाल अधिकांश समय कुशवाहा के घर पर रहता था। कुशवाहा की पत्नी शिव कन्या और जयसवाल दोनों भगवत प्रसाद एजुकेशन एंड वेलफेयर ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य थे। जयसवाल उनकी पत्नी रेणु जयसवाल, पुत्र श्याम सुंदर जयसवाल, मुरली मनोहर जयसवाल और प्रीतम जयसवाल दस कंपनियों के निदेशक थे। ये कंपनियां हैं- मैसर्स श्याम गंगा रिलेटर एंड स्टेट प्रा.लि., मैसर्स विद्या शक्ति सीमेंट प्रा.लि., मैसर्स श्याम गंगा र्बिल्डस प्रा.लि., मैसर्स श्याम गंगा मार्केटिंग प्रा.लि., मैसर्स रेणु रेजिडेंसी प्रा.लि., मैसर्स बारहज कोल्ड स्टोरेज प्रा.लि., मैसर्स महाकालेर जिम एंड फिटनेस प्रा.लि., महाकालेर माईनिंग एंड मैनेजमेंट प्रा.लि., मैसर्स श्याम गंगा ट्रेवल एंड ट्रांसपोर्ट प्रा.लि. और मैसर्स रेणुका अग्रीलैंड फार्म हाउस प्रा.लि.। सीबीआई ने जांच में पाया कि कोलकाता के चार्टर्ड एकाउंटेंट ने इन लोगों की काली कमाई को निवेश किया और बाद में दान के रूप में रकम उनके ट्रस्ट को दे दी। सीबीआई ने जांच में पाया कि कुशवाहा के सहयोगी ने प्रतियोगिता परीक्षा के लिए कोंचिंग सेंटर खोल रखा था। छह माह बाद इस कोचिंग सेंटर ने छह कंपनियों को खरीद लिया जिनमें एक है - संघाई डिस्ट्रीब्यूटर प्रा.लि.। यह कंपनी कई कारोबार करती थी। बाद में इस कंपनी ने एक्सिस एजुकेशन सोसायटी को संबद्ध किया जिसका उद्देश्य इंजीनियरिंग कालेज खोलना था। सूत्रों के अनुसार कुशवाहा ने घोटाले की रकम को इन कंपनियों में भी निवेश कर दिया। इसमें चार्टर्ड एकांउटेंट ने मदद की। इन मामलों में आज की तिथि तक जांच के दौरान सीबीआई ने विभिन्न सरकारी अधिकारियों, लाभार्थी कंपनियों के अधिकारियों के आवास और कार्यालयों समेत 183 स्थानों की जांच की है। इसके अलावा 1.6 करोड़ रुपए नकद जब्त किया और आरोपियों और संदिग्धों के विभिन्न बैंक खातों में जमा 14.80 करोड़ रु निकालने पर रोक लगा दी है।

राष्ट्रीय सहारा दिल्ली संस्करण पेज -2 दिंनाक ०६ ०९-२०१२ Hkz”Vkpkj

पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा व उसके सहयोगी की राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के धन से कमाई गई करीब 42 करोड़ रु की संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई अब शुरू हो जाएगी। सीबीआई ने इस बावत प्रवर्तन निदेशालय से कहा कि कुशवाहा व सहयोगी की संपत्ति का पता लगा लिया गया है, इसलिए उनकी संपत्ति जब्त की जाए। सीबीआई ने फिलहाल इन लोगों की करीब 42 करोड़ रु की संपत्ति का पता लगाया है जो एनआरएचएम घोटाले से कमाई गई था। प्रवर्तन निदेशालय भी एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रहा है। हाल में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के आला अधिकारियों की बैठक हुई जिसमें सीबीआई ने प्रवर्तन निदेशालय से कहा है कि घोटाले में प्रिवेंसन ऑफ मनी लांड्रिंग का मामला भी बनता है, इसलिए फिलहाल जिस 42 करोड़ की संपत्ति का पता चला है उसको जब्त करने की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू की जाए। उल्लेखनीय है कि सीबीआई को इस मामले में उत्तर प्रदेश के न्यायालय से फटकार भी लगी है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने अपनी जांच में आई मनी ट्रेल की जानकारी भी ईडी को दे दी है। सीबीआई ने कहा कि पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और उसके सहयोगी राम प्रसाद जयसवाल द्वारा एनआरएचएम की 35 करोड़ रु की रकम को विभिन्न रास्तों से अपनी कंपनी और सोसायटी में लगाया गया। सीबीआई ने जांच में पाया कि कैसे एक रुपए के काम को दस रुपए में दिया गया और रकम को दस से अधिक चैनलों द्वारा अपनी कंपनी में लाया गया। सीबीआई ने पाया कि कुशवाहा ने कानपुर स्थित अपने सहयोगी को करोड़ों रुपए दिए। उस सहयोगी ने उस रकम को कानपुर के चार्टर्ड एकांउटेंट को दी। उस एकांउटेंट ने उस रकम को कानपुर और दिल्ली की कंपनियों को दिया। बाद में चेक द्वारा रकम कुशवाहा के ट्रस्ट में दे दी गई। कानपुर स्थित कुशवाहा के सहयोगी ने कुछ रकम शिव कन्या को भी दान किया जिसके निदेशक भी कुशवाहा थे। इसी तरह राम प्रकाश जयसवाल ने पटना स्थित एक एकांउटेंट को नकद रकम दी। उस एकांउटेंट ने कोलकाता के एक चार्टर्ड एकांउटेंट से संपर्क किया और नकद राशि ठिकाने लगाने को कहा। उस एकांउटेंट ने रकम को कोलकाता स्थित कालेधन को सफेद करने वाली कंपनी में निवेश कर दिया। इसके बाद इस कंपनी ने उस रकम को चेक द्वारा जयसवाल और उनके परिवार की कंपनी में दान कर दिया। सीबीआई ने जांच में पाया कि जयसवाल अधिकांश समय कुशवाहा के घर पर रहता था। कुशवाहा की पत्नी शिव कन्या और जयसवाल दोनों भगवत प्रसाद एजुकेशन एंड वेलफेयर ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य थे। जयसवाल उनकी पत्नी रेणु जयसवाल, पुत्र श्याम सुंदर जयसवाल, मुरली मनोहर जयसवाल और प्रीतम जयसवाल दस कंपनियों के निदेशक थे। ये कंपनियां हैं- मैसर्स श्याम गंगा रिलेटर एंड स्टेट प्रा.लि., मैसर्स विद्या शक्ति सीमेंट प्रा.लि., मैसर्स श्याम गंगा र्बिल्डस प्रा.लि., मैसर्स श्याम गंगा मार्केटिंग प्रा.लि., मैसर्स रेणु रेजिडेंसी प्रा.लि., मैसर्स बारहज कोल्ड स्टोरेज प्रा.लि., मैसर्स महाकालेर जिम एंड फिटनेस प्रा.लि., महाकालेर माईनिंग एंड मैनेजमेंट प्रा.लि., मैसर्स श्याम गंगा ट्रेवल एंड ट्रांसपोर्ट प्रा.लि. और मैसर्स रेणुका अग्रीलैंड फार्म हाउस प्रा.लि.। सीबीआई ने जांच में पाया कि कोलकाता के चार्टर्ड एकाउंटेंट ने इन लोगों की काली कमाई को निवेश किया और बाद में दान के रूप में रकम उनके ट्रस्ट को दे दी। सीबीआई ने जांच में पाया कि कुशवाहा के सहयोगी ने प्रतियोगिता परीक्षा के लिए कोंचिंग सेंटर खोल रखा था। छह माह बाद इस कोचिंग सेंटर ने छह कंपनियों को खरीद लिया जिनमें एक है - संघाई डिस्ट्रीब्यूटर प्रा.लि.। यह कंपनी कई कारोबार करती थी। बाद में इस कंपनी ने एक्सिस एजुकेशन सोसायटी को संबद्ध किया जिसका उद्देश्य इंजीनियरिंग कालेज खोलना था। सूत्रों के अनुसार कुशवाहा ने घोटाले की रकम को इन कंपनियों में भी निवेश कर दिया। इसमें चार्टर्ड एकांउटेंट ने मदद की। इन मामलों में आज की तिथि तक जांच के दौरान सीबीआई ने विभिन्न सरकारी अधिकारियों, लाभार्थी कंपनियों के अधिकारियों के आवास और कार्यालयों समेत 183 स्थानों की जांच की है। इसके अलावा 1.6 करोड़ रुपए नकद जब्त किया और आरोपियों और संदिग्धों के विभिन्न बैंक खातों में जमा 14.80 करोड़ रु निकालने पर रोक लगा दी है।

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