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लखनऊ (एसएनबी)। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत एम्बुलेंस सेवा, मैन पावर सप्लाई और अंधता निवारण कार्यक्रम में हुई गड़बड़ियों की जांच कर रही सीबीआई ने शुक्रवार को राजधानी स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में चार आरोप पत्र दाखिल किये, जिसमें 27 सरकारी डाक्टरों समेत कुल 36 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है। सीबीआई को दस दिन पूर्व ही प्रदेश सरकार ने 34 डाक्टरों व सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अभियोजन चलाने की स्वीकृति प्रदान की थी, जिसके बाद सीबीआई ने इस मामले में चार आरोप पत्र आज सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन पश्चिम की अदालत में प्रस्तुत किये। आरोप पत्र में कुल 86 लाख रुपये की गड़बड़ी किये जाने के प्रमाण सीबीआई की ओर से दिये गये हैं, जिस पर न्यायाधीश ने जांच एजेंसी को जल्द ही इससे संबंधित सभी दस्तावेज जमा करने को कहा है। सीबीआई की ओर से अदालत में प्रस्तुत की गयी पहली चार्जशीट में कुल 29 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है, जिसमें 23 डाक्टर हैं। यह मामला वर्ष 2010- 11 में एम्बुलेंस सेवाओं के लिए किये गये करीब पचास लाख रुपये के फर्जी भुगतान को लेकर दर्ज किया गया था। जांच के दौरान सीबीआई को मालूम पड़ा कि एम्बुलेंस सेवा के लिए टेंडर केवल बाल महिला चिकित्सालयों के लिए ही दिया गया था जबकि इसके तमाम बिल कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के नाम से भी पास कर दिये गये। जिन डाक्टरों को इसमें आरोपित बनाया गया है, उन्होंने इसके बिलों को पास किया था। ज्यादातर बिलों में या तो एम्बुलेंस का रजिस्ट्रेशन नम्बर डाला ही नहीं गया। जिन बिलों में रजिस्ट्रेशन नंबर मिले उनकी जांच की गयी तो वे दो पहिया वाहनों व प्राइवेट गाड़ियों के निकले। सीबीआई ने अपनी जांच के दौरान करीब 15 लाख रुपये के ऐसे बिल पकड़े, जो बोगस थे। सीबीआई ने वर्ष 2009-10 के दौरान एम्बुलेंस सप्लाई के ठेके में हुई 22 लाख रुपये की अनियमितता के मामले में एक दूसरी चार्जशीट भी शुक्रवार को दाखिल की, जिसमें राजधानी के पूर्व सीएमओ डा. एके शुक्ल समेत कुल 18 लोगों को अभियुक्त बताया गया है। इन दोनों ही आरोप पत्रों में प्राइवेट ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक रवीन्द्र बहादुर सिंह को अभियुक्त बनाया गया है। सीबीआई द्वारा प्रस्तुत की गयी तीसरी चार्जशीट एनआरएचएम योजना के लिए मैन पावर सप्लाई में हुई गड़बड़ियों को लेकर थी। इस मामले की जांच के दौरान जांच एजेंसी ने पाया कि दिसम्बर 2010 व जनवरी 2011 के दौरान ओमेगा सिक्योरिटी सर्विसेज के मालिक गौरी शंकर सिंह ने ज्यादा कर्मचारियों की आपूर्ति दर्शाकर करीब 12 लाख रुपये का भुगतान गलत तरीके से कराया गया। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि यह पैसा पूर्व डिप्टी सीएमओ डा. वाईएस सचान के पास पहुंचा था। सीबीआई ने अंधता निवारण कार्यक्रम में हुई गड़बड़ियों को लेकर एक निजी चिकित्सक डा. विजय त्रिपाठी के खिलाफ चौथा आरोप पत्र दाखिल किया। डा. त्रिपाठी का कानपुर रोड स्थित एलडीए कालोनी में निजी नर्सिग होम है। उन्हें अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत मोतियाबिंद का आपरेशन करने के लिए करीब तीस लाख रुपये का भुगतान किया गया था। सीबीआई ने करीब 172 मरीजों के सभी विवरण एकत्र कर इसकी जांच की तो पता चला कि ज्यादातर कागजातों में एक ही व्यक्ति के अंगूठे के निशान हैं। सीबीआई अब तक 16 लाख रुपये के भुगतान की जांच कर चुकी है, जिसमें दो लाख रुपये की सीधी गड़बड़ी किये जाने के प्रमाण उसे मिल चुके हैं।नौ सरकारी कर्मचारी भी बनाए गए अभियुक्त एम्बुलेंस सेवा और अंधता निवारण कार्यक्रम में हुई गड़बड़ियों पर सीबीआई ने दाखिल की चार्जशीटउत्तर प्रदेश सरकार ने दस दिन पूर्व 34 डाक्टरों व सरकारी कर्म चारियों के खिलाफ दी थी अभियोजन की स्वीकृति

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