ठ्ठजागरण ब्यूरो, नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कर्नाटक में लौह अयस्क के अवैध खनन और अवैध निर्यात पर कड़ा रुख अपनाते हुए सीबीआइ को कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने बड़े पैमाने पर हुए अवैध खनन और गैर कानूनी निर्यात से अनभिज्ञ रहने पर कर्नाटक सरकार की खिंचाई भी की। वन मामलों की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति आफताब आलम, केएस राधाकृष्णन व स्वतंत्र कुमार की पीठ ने एक जनवरी 2009 से 31 मई 2010 के बीच कर्नाटक की खदानों से अवैध खनन के जरिए निकाले गए 50.7 लाख टन लौह अयस्क की जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही निकाले गए लौह अयस्क के गैर कानूनी निर्यात की जांच के भी आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि सीबीआइ इसके अलावा कोर्ट के आदेश पर जब्त आठ लाख टन लौह अयस्क के भी गैर कानूनी ढंग से बेलकरी पोर्ट से निर्यात किए जाने का मामला दर्ज करेगी और जांच कर छह सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करेगी। जिन कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा उनमें अदानी इंटरप्राइजेस लिमिटेड भी शामिल है। अदानी के अलावा श्री मल्लिकार्जुन शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड, सालगांवकर माइनिंग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और राज महल सिल्क भी शामिल हैं। कोर्ट ने सीबीआइ को वन मामलों की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिक जांच करने को कहा है। सीईसी ने गत 27 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में पेश अपनी रिपोर्ट में अवैध खनन की बात कहते हुए मामले की जांच के आदेश देने का अनुरोध दिया था। कोर्ट ने कर्नाटक सरकार की खिंचाई करते हुए पूछा कि करीब 17 महीने तक इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन होता रहा और उसे पता भी नहीं चला? अवैध खनन से निकाले गए लौह अयस्क का बेलकरी पोर्ट से निर्यात होता रहा और उसकी सीबीसीआइडी को पता ही नहीं चला? पीठ ने कहा कि ये कैसे मान लिया जाए कि पांच लाख ट्रकों से खनन सामग्री बेलकरी पोर्ट पहंुचती है और राज्य सरकार की एजेंसी को पता ही नहीं चलता?

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