Friday, September 7, 2012

गोवा में अवैध खनन के लिए जिम्मेदार कामत


पणजी, एजेंसी: कोयला घोटाले पर घिरी केंद्र सरकार के लिए मानसून सत्र का आखिरी दिन नई मुसीबत लेकर आया। केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त न्यायिक आयोग ने अपनी रिपोर्ट में गोवा की पिछली कांग्रेस सरकार के मुखिया और तत्कालीन खनन मंत्री दिगंबर कामत को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि अवैध खनन की जानकारी के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री आंखें मूंदे रहे। इससे पर्यावरण की कीमत पर कई व्यक्तियों और कंपनियों ने अकूत दौलत इकट्ठा की। गोवा में लौह अयस्क और मैगनीज के अवैध खनन की जांच कर रहे जस्टिस एमबी शाह आयोग की यह रिपोर्ट शुक्रवार को केंद्रीय खनन मंत्री दिनशा पटेल ने संसद में पेश की। आयोग ने कामत द्वारा खनन पट्टे के नवीनीकरण में देरी पर क्षमादान के आवेदन को स्वीकार करने को गैरकानूनी और शक्ति का दुरुपयोग बताया। जबकि ऐसा करने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार को है। रिपोर्ट के अनुसार, खनन क्षेत्र में अनियमितताओं पर कामत ने कोई कार्रवाई नहीं की। न ही तटीय क्षेत्र में अवैध खनन से पर्यावरण, पारिस्थितिकी तंत्र को हो रहे नुकसान की शिकायतों पर ध्यान दिया। आयोग के अनुसार पिछले पांच सालों के दौरान (जब कामत मुख्यमंत्री रहे), उस दौरान राज्य के खनन एवं भूगर्भ निदेशालय ने एक भी खनन पट्टे का मौके पर जाकर जांच करना मुनासिब नहीं समझा। आयोग ने यह भी पाया कि दशकों से खनन पट्टे हथियाए चुनिंदा लोग अरबपति हो गए। जस्टिस शाह ने नीलामी के जरिये पट्टे दिए जाने की सिफारिश की है। केंद्रीय खनन मंत्रालय ने अपनी कार्रवाई रिपोर्ट में कहा कि माइंस एंड मिनरल्स बिल, 2011 में नीलामी के जरिये पट्टे जाने का विषय शामिल है जो संसदीय समिति के विचाराधीन है। हालांकि कामत पर कार्रवाई को लेकर कोई जिक्र तक नहीं है।


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