नई दिल्ली सरकार और कांग्रेस पर कोयले की कालिख में दागदार माने जा रहे कांग्रेसी नेताओं पर कार्रवाई का दबाव बढ़ने लगा है। कोयला घोटाले में शामिल कांग्रेस के आधा दर्जन से ज्यादा नेताओं के नाम खुलकर सामने आ गए हैं तो सरकार को सहयोग देते रहे तीन-चार नेताओं ने भी इसका फायदा उठाया है। नए रहस्योद्घाटनों के बाद भाजपा और सरकार की सहयोगी सपा ने कांग्रेस पर हमले तेज कर दिए हैं। इन हमलों को देखते हुए श्रीप्रकाश जायसवाल, संतोष बगरोडिया, सुबोधकांत सहाय, नवीन जिंदल, विजय दरडा, केएस जगतरक्षकण, प्रेमचंद गुप्ता और मधु कोड़ा समेत कई नेताओं पर तलवार लटकती दिखाई दे रही है। कोयला ब्लाक का आवंटन रद करने या उसकी जांच को अब तक नकारती रही सरकार के लिए हर दिन भारी पड़ता जा रहा है। सरकार और कांग्रेस की परेशानी यह है कि यह मामला वर्षो पहले के बोफोर्स घोटाले की तरह बड़ा मुद्दा बन गया है। यही कारण है कि नित नए नाम सामने आ रहे हैं। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को तीखा व्यंग्य करते हुए कहा कि कांग्रेसी नेताओं के संबंधियों का उद्यम तभी रंग लाता है जब भाई मंत्री होते हैं। बगरोडिया के भाई को 23 हजार करोड़ का ब्लाक आवंटित कर दिया गया तो जायसवाल के कोयला मंत्री रहते बिना स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक के 36 कंपनियों को 17 ब्लाक दे दिए गए। कई कोयला ब्लाकों का आवंटन हासिल कर चुके मनोज जायसवाल से श्रीप्रकाश की निकटता साबित करते हुए रविशंकर ने कहा कि क्या श्रीप्रकाश, मनोज जायसवाल के एक पारिवारिक मामले में मध्यस्थ नहीं बने थे। सहाय ने भी उस कंपनी के लिए प्रधानमंत्री से सिफारिश की थी जिसमें उनके भाई निदेशक हैं। रविशंकर ने कोयला घोटाले में अब तक सामने आए नामों का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में कांग्रेस की बड़ी भूमिका है। उन्होंने मांग की कि सभी आवंटन रद कर इस मामले की एसआइटी से जांच कराई जाए। भाजपा के साथ साथ जदयू और सपा ने भी सरकार की चुप्पी पर हमला किया। जदयू अध्यक्ष शरद यादव और सपा महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने कहा कि कोयला घोटाले में हर दिन नए कांग्रेसी का नाम जुड़ रहा है। यह 2जी घोटाले से भी बड़ा है। रामगोपाल ने अचरज जताते हुए कहा, जायसवाल जिस दिन मंत्री बने उसी दिन तीन कोयला ब्लाक आवंटित कर दिए। प्रधानमंत्री को पूरे मामले की जांच करानी चाहिए।
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