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नई दिल्ली (एसएनबी)। उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक के वन क्षेत्र से करीब डेढ़ साल की अवधि में 50.7 लाख मीट्रिक टन लौह अयस्क के अवैध खनन और फिर बेलकरी बंदरगाह से उसके निर्यात की घटना की सीबीआई से जांच के आदेश दिये हैं। न्यायमूर्ति आफताब आलम, न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की विशेष खंडपीठ ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने का भी आदेश दिया। जांच ब्यूरो को छह सप्ताह के भीतर सारे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट न्यायालय को सौंपनी हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि इस मामले से संबंधित किसी भी याचिका पर देश की कोई भी अदालत विचार नहीं करेगी। जांच ब्यूरो को पता लगाना है कि वन विभाग द्वारा जब्त किया गया करीब आठ लाख मीट्रिक टन लौह अयस्क कथितरूप से बंदरगाह पर सेवा प्रदाता चार कंपनियों ने बेलकरी तट से विभिन्न विदेशी कंपनियों को कैसे निर्यात किया गया। गैरकानूनी तरीके से लौह अयस्क निर्यात करने के आरोपों में घिरी कंपनियों में अदानी इंटरप्राइसेज लि., श्री मल्लिकाजरुन शिपिंग प्रा. लि., सालगांवकर माइनिंग इंडस्ट्रीज प्रा. लि. और राजमहल सिल्क्स शामिल हैं। न्यायालय ने कर्नाटक सरकार से भी सवाल किया है कि सीबी- सीआईडी जैसी कानून लागू करने वाली एजेंसियां उसके वन क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर लौह अयस्क के अवैध खनन और फिर इस खनिज को 17 महीने के दौरान करीब पांच लाख ट्रकों से बेलकरी बंदरगाह भेजे जाने की गतिविधियों के बारे में कैसे अनभिज्ञ थीं। न्यायाधीशों ने सीबीआई को कर्नाटक के वन क्षेत्र से लौह अयस्क के अवैध खनन और फिर वहां से इसे बेलकरी बंदरगाह पहुंचाने के मामले में प्राथमिकी दर्ज करके गहराई से इसकी व्यापक जांच का निर्देश दिया है। इसी बंदरगाह से एक जनवरी, 2009 से 31 मई, 2010 के दौरान यह लौह अयस्क विदेशी कंपनियों को निर्यात किया गया था। न्यायालय ने जांच एजेंसी से कहा है कि वह शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त अधिकार प्राप्त समिति की दो रिपोर्ट के आधार पर प्रारम्भिक जांच करे। इन रिपोर्ट में सारे मामले की गहराई से जांच की सिफारिश की गई है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश

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