ठ्ठजागरण ब्यूरो, नई
दिल्ली बोइंग
विमान खरीद व विमानों को पट्टे पर लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने
केंद्र सरकार, एयर
इंडिया, सीबीआइ
व सीवीसी को नोटिस जारी किया है। साल 2004 से 2008 के
दौरान यह सौदा तब के नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल के
कार्यकाल में हुआ था। खंडपीठ ने एक गैर सरकारी संगठन सेंटर
फार पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआइएल) की याचिका पर सुनवाई के बाद ये
नोटिस जारी किए। याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट के
फैसले को चुनौती दी गई है। आरोप लगाया गया है कि 111 बोइंग विमान खरीदने, विमान
पट्टे पर लेने और फायदे वाले मार्ग निजी एयरलाइनों को देने के
उड्डयन मंत्रालय के फैसले से निजी कंपनियों को लाभ पहंुचा
और सरकार व एयर इंडिया को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। याचिका में कहा
गया है कि 111 बोइंग
विमान करीब 67,000 करोड़
में खरीदे गए। इससे विदेश की कई कंपनियों को
लाभ पहंुचा। कई विमान पट्टे पर लिए गए, इससे
भी नुकसान हुआ।
इसके बाद एयर इंडिया से फायदे के मार्ग व समय बदलने को कहा गया, इससे निजी
एयर लाइंस को लाभ पहंुचा। इन अनियमितताओं की सीबीआइ या विशेष
जांच दल
(एसआइटी) से जांच कराई जानी चाहिए। शुक्रवार को याचिकाकर्ता की ओर से बहस
करते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने भी माना था कि उड्डयन
मंत्रालय के निर्णयों में खामी हो सकती है और मामले की जांच होनी चाहिए।
लेकिन हाई कोर्ट ने सीबीआइ जांच का आदेश देने की बजाय संसद की लोक लेखा
समिति को
मामले पर विचार करने को कह दिया। भूषण का कहना था कि उन्होंने
सीबीआइ जांच मांगी थी जिसका हाई कोर्ट ने आदेश नहीं दिया। इसलिए अब
सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि दो
संसदीय समितियों ने इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट देकर जांच कराए जाने की
सिफारिश की थी। इसके अलावा कैग ने भी अपनी रिपोर्ट में इसकी पुष्टि की थी।
दैनिक जागरण राष्ट्रीय
संस्करण पेज -3,22 -9-2012 Hkz”Vkpkj

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