नई दिल्ली, प्रेट्र : कोल ब्लॉक आवंटन पर अपनी
रिपोर्ट को लेकर विवादों में आए भारत के नियंत्रक एवं
महालेखापरीक्षक (कैग) विनोद राय को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
एसएच कपाडि़या से शनिवार को एक तरह का समर्थन मिला। प्राकृतिक संपदा
के मूल्यांकन पर कैग की रिपोर्ट का परोक्ष समर्थन करते हुए न्यायमूर्ति
कपाडि़या ने कहा कि हानि हकीकत पर आधारित होती है जबकि लाभ अनुमानित
होता है। एक अर्थशास्त्री की तरह विवेचना करते हुए उनका कहना था कि
लाभ पर अलग-अलग राय हो सकती है। आर्थिक सुधारों पर मुख्य न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह के शुक्रवार के देश के नाम संबोधन की भी सराहना की। न्यायमूर्ति
कपाडि़या ने यह टिप्पणी विज्ञान भवन में एशिया में आर्थिक विकास
एवं औद्योगिक वातावरण में बदलाव पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
को संबोधित करते हुए की। अपने भाषण के दौरान उन्होंने हालांकि 2जी और
कोल ब्लॉक आवंटन में राजस्व के नुकसान को लेकर कैग की रिपोर्ट का कोई सीधा
जिक्र नहीं किया। लेकिन मूल्यांकन पर जारी विवाद की चर्चा उन्होंने अपने
संबोधन के क्रम में ही की। न्यायमूर्ति कपाडि़या का कहना था, हम
कोई टीवी
कार्यक्रम देखते हैं और उसके बारे में धारणा बनाते हैं। लेकिन हम में से
कितने ऐसे लोग हैं जो मूल्यांकन के मूल सिद्धांत से वाकिफ हैं। न्यायमूर्ति
कपाडि़या के अनुसार, आजकल
मूल्यांकन को लेकर कई विवादों पर चर्चा जारी है, जबकि
इस बारे में मूल सिद्धांत यह है कि नुकसान हकीकत है और लाभ
अनुमानित है। फायदे को लेकर बहसबाजी हो सकती है, लेकिन नुकसान पर नहीं। कैग
की रिपोर्ट की चर्चा किए बगैर उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कहा कि मूल्यांकन
को लेकर जारी विवाद को अगर अर्थशास्त्र की इस अवधारणा की कसौटी पर
कसा जाता है तो हम सही निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं। हवा में तीर मारने से
कुछ नहीं होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन का एक सटीक अर्थशास्त्रीय
आधार है, जब
तक हम उसका इस्तेमाल नहीं करेंगे, सच्चाई की तह तक
नहीं पहुंच पाएंगे।
दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण पेज -1,23-9-2012
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