Tuesday, September 11, 2012

सात साल में नौ गुना बढ़ा कांग्रेस का खजाना


नई दिल्ली, प्रेट्र : देश के राजनीतिक दलों के खजाने में वर्ष 2004-11 के दौरान 4,662 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। कांग्रेस 2,008 करोड़ रुपये के साथ सबसे ऊपर है। वर्ष 2004 में कांग्रेस के खजाने में 222 करोड़ रुपये थे। वहीं, भाजपा का खजाना वर्ष 2004 के 307 करोड़ से तीन गुना से कुछ ज्यादा बढ़कर 2011 में 994 करोड़ रुपये पहुंच गया। पार्टियों के खजाने में यह धन चंदा और अन्य स्रोतों के जरिये जमा हुआ है। गैरसरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉ‌र्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच (एनईडब्ल्यू) ने वर्ष 2004-11 के बीच आयकर रिटर्न व चुनाव आयोग को सौंपी दानदाताओं की सूची के आधार पर 23 बड़ी पार्टियों की आय की रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने केंद्र की सत्ता संभालने के बाद ज्यादातर आय कूपनों की बिक्री से की है। पार्टी के खजाने में महज 14.42 फीसद राशि दान से इकट्ठी हुई है। वहीं, भाजपा के खजाने में 81.47 फीसद धन कॉरपोरेट घरानों और बड़ी कंपनियों के ट्रस्ट से मिले चंदे से इकट्ठे हुए हैं। एनजीओ ने पार्टियों के खजाने को ब्लैक बॉक्स की संज्ञा दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में भ्रष्टाचार की मूल जड़ राजनीतिक दलों को मिलने वाला चंदा है। एडीआर के संस्थापक सदस्य प्रोफेसर जे. छोकर ने कहा कि इस चंदे के नियमन से भ्रष्टाचार को खत्म तो नहीं किया जा सकता, लेकिन गहरी चोट पहुंचाई जा सकती है। आदित्य बिड़ला समूह के जनरल इलेक्टोरल ट्रस्ट (जीईटी) और टोरेंट पावर लिमिटेड ने कांग्रेस व भाजपा दोनों दलों को चंदा दिया है। जीईटी ने कांग्रेस को 36.4 करोड़ और भाजपा को 26 करोड़ रुपये दिए। आश्चर्यजनक तरीके से माकपा को वर्ष 2004-11 के बीच 417 करोड़ रुपये की आय हुई। इसी दौरान बसपा ने 484 करोड़ रुपये जुटाए। वहीं, सपा को इस अवधि में 278 करोड़ रुपये मिले। रिपोर्ट में बताया गया है कि 18 क्षेत्रीय पार्टियों ने वर्ष 2004 से चुनाव आयोग को अपनी आय से जुड़ी कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी है। ऐसी पार्टियों में जम्मू-कश्मीर की नेशनल कांफ्रेंस, तृणमूल कांग्रेस और हरियाणा की इनेलो शामिल हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पार्टियां विदेश से मिलने वाले चंदे में नियमों को ताक पर रखती रही हैं।


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