Saturday, September 15, 2012

कोयला आवंटन मामले में केंद्र से जवाब तलब




सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सरकार को स्पष्टीकरण देने की जरूरत

नई दिल्ली (एसएनबी)। कोयला ब्लॉक आवंटन में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर चौतरफा घिरी केंद्र की यूपीए सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने कई तीखे सवाल पूछे। अदालत ने सरकार से पूछा है कि क्या निजी कंपनियों को कोयले के प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन करते समय दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन किया गया। कोर्ट ने केंद्र की उस दलील को भी सिरे से नकार दिया जिसमें कहा गया कि न्यायपालिका को इस मुद्दे पर इसलिए विचार नहीं करना चाहिए क्योंकि याचिका कैग रिपोर्ट पर आधारित है जिसे संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) देख रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीएसी का कार्यक्षेत्र अलग है। संसद और पीएसी, कैग रिपोर्ट के आधार पर काम करते हैं। अदालत उनके कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। लेकिन याचिका में कई मुद्दों को उठाया गया है। इसमें ठोस बातें उठाई गई हैं जिसके बारे में सरकार को स्पष्टीकरण देने की जरूरत है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने कैग के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाने वाली सरकार से कहा कि यह एक संवैधानिक संस्था है। उसकी रिपोर्ट महत्वपूर्ण है। जस्टिस आरएम लोढा और एआर दवे की बेंच ने कहा कि याचिका में गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। इन पर सरकार को स्पष्टीकरण देने की जरूरत है। बेंच ने कहा कि आपने भले ही नीति बनाई होगी। लेकिन यह सिर्फ संयोग ही हो सकता है कि राजनेताओं या उनके संबंधियों को कोल ब्लॉक आवंटित किए गए हों। यह प्राकृतिक संसाधन है, सरकार की संपदा नहीं है। अदालत ने केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसीटर जनरल रोहिंगटन नरिमन से कहा कि बेंच सरकार की ओर से कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए तैयार किए गए दिशा निर्देशों से जुड़े पहलुओं तक ही अपने को सीमित रख रही है। अदालत ने यह आदेश कोयला ब्लॉक आवंटन में कथित अनियमितताओं के बारे में वकील एमएल शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। केंद्र को इस मसले पर आठ सप्ताह में अदालत को स्पष्टीकरण देना है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह भी बताने को कहा कि 2004 में कोयला ब्लॉक आवंटन में प्रतिस्पर्धा बोली की नीति नहीं अपनाने के पीछे क्या बाधाएं थीं। इसके साथ ही बेंच ने यह भी जानना चाहा कि उन आवंटियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करने का प्रस्ताव किया गया है जिन्होंने आवंटन की शतरे का पालन नहीं किया और समझौते को तोड़ा। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसे मुख्य रूप से कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ी नीतियों व दिशा निर्देशों के पालन की चिंता है। कथित अनियमितता की सीबीआई से जांच कराने की मांग समेत अन्य आग्रहों पर अभी विचार नहीं किया जाएगा। नरिमन ने कहा कि आवंटन में घोटाले से जुड़ी कथित अनियमितता के मुद्दे पर सीबीआई पहले से जांच कर रही है। इस पर बेंच ने कहा कि अदालत अभी सिर्फ आवंटन के विषय को देख रही है। अदालत ने कहा, ‘हमारा ध्यान कोयला ब्लॉक आवंटन पर दिशा निर्देशों के पालन से जुड़े विषय पर है।

पीठ ने कहा, आपने भले ही नीति बनाई होगी लेकिन यह सिर्फ संयोग ही हो सकता है कि राजनेताओं या उनके संबंधियों को कोल ब्लॉक आवंटित किए गए हों। यह प्राकृतिक संसाधन है , सरकार की संपदा नहीं है


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