अजय तिवारी/एसएनबी नई दिल्ली। कोयला ब्लॉक पाने वाली कंपनियों में सबसे ज्यादा स्टील कंपनियों की जांच हो रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ब्लॉक पाने वाली 70 फीसदी स्टील कंपनियों के रिकॉर्ड संदिग्ध हैं। बताया जा रहा है कि तमाम कंपनियां कोयला ब्लॉक पाने के लिए रातों-रात खड़ी की गई और उनका स्टील उत्पादन से कोई सीधा लेना-देना नहीं है। आधे से ज्यादा कोयला ब्लॉक स्टील कंपनियों के ही हिस्से में आए थे। पचास कोयला ब्लॉक हथियाने वाली बिजली कंपनियों में कम से कम 10 फीसदी संदिग्ध हैं। इन दस फीसदी का भी पिछला रिकार्ड बिजली उत्पादन का नहीं रहा है। कंपनियों के कागजात सहीं नहीं होने के बारे में पूछे जाने पर कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल कहते हैं कि राज्य अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते क्योंकि पहले कागजात देखने की जिम्मेदारी राज्यों के अफसरों की ही होती है। उन्होंने कहा कि जांच हो रही है। इस मामले में गड़बड़ी पकड़ में आने पर राज्यों के अफसर भी नपेंगे। इससे आगे वह कुछ नहीं कहते। लेकिन जांच अधिकारियों ने जिस तरह से कोयला मंत्रालय में ब्लॉक से संबंधित कागजात जमा किए हैं उसके मद्देनजर वरिष्ठ अधिकारी भी इस बात से इनकार नहीं कर रहे हैं कि इस मामले में मंत्रालय के तत्कालीन अफसरों पर भी शिंकजा कस सकता है। बताया जा रहा है कि जांच इस बात की भी हो रही है कि जब स्टील, बिजली और सीमेंट कंपनियों को ये कोयला ब्लॉक समान रूप से दिए जाने थे तो सीमेंट कंपनियों के हिस्से में सबसे कम ब्लॉक क्यों आए। राजनीतिक स्तर पर ज्यादा पैरवी पहले स्टील और फिर बिजली कंपनियों के लिए ही क्यों की गई। सवाल इस पर भी उठ रहे हैं कि सरकारी कंपनियों कोल इंडिया, सेल, एनटीपीसी और नाल्को की कोयला ब्लॉक की डिमांड को पूरा क्यों नहीं किया गया? इस मामले की पांच साल पहले शिकायत करने वाले सांसद हंसराज अहीर भी ‘राष्ट्रीय सहारा’ से कहते हैं कि पूरी दाल ही काली है। उन्होंने कहा कि ब्लॉक पाने वाली बहुसंख्यक कंपनियां ही फर्जी हैं और प्रधानमंत्री के यहां सुनवाई नहीं होने पर यह बात उन्होंने सीवीसी को बताई थी। पूछा गया कि किन कंपनियों को फर्जी बता रहे हैं तो उन्होंने साफ कहा कि 90 प्रतिशत स्टील कंपनियों को, जिनकी जांच हो रही है। हालांकि गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों के इस मामले में फंसने पर अहीर कहते हैं कि नहीं, उनकी भूमिका ऐसी नहीं थी। बताते चलें अहीर भाजपा के सांसद हैं।
अधिकांश कंपनियों का स्टील उत्पादन से नहीं था सीधा लेना-देना बिजली कंपनियों में भी 10 फीसद ने पहले कभी नहीं बनाई थी बिजली

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