ठ्ठजागरण ब्यूरो, नई दिल्ली अगर कोयला कंपनियों के तर्क को अंतर मंत्रालयी समूह (आइएमजी) ने स्वीकार किया तो उसके लिए अधिकांश ब्लॉकों के आवंटन को रद करने की सिफारिश करना आसान नहीं होगा। पिछले दो दिनों की बैठक के दौरान आइएमजी के सामने करीब डेढ़ दर्जन कंपनियों ने कोयला उत्खनन में देरी के लिए परोक्ष तौर पर सरकारी नियमों और मंजूरी मिलने में आने वाली बाधाओं को ही जिम्मेदार ठहराया है। आइएमजी के समक्ष शुक्रवार को दूसरे दिन भी कोयला ब्लॉक हासिल करने वाली कंपनियों की पेशी हुई। निजी क्षेत्र की प्रमुख बिजली कंपनी रिलायंस पावर ने समूह के सामने इस बात को सिरे से नकार दिया कि उसकी सासन अल्ट्रा मेगा पावर परियोजना (यूएमपीपी) को मिले कोयला ब्लॉकों में खनन शुरू करने में देरी हो रही है। कंपनी के सीईओ जेपी चेलसानी ने बाद में बताया कि, हमारे जिस कोयला ब्लॉक को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसमें तो खनन निर्धारित समय से पहले ही शुरू हो गया है। रिलायंस के सासन यूएमपीपी के लिए वर्ष 2007 में मध्य प्रदेश में कोयला ब्लॉक दिए गए थे। आइएमजी के सामने एक अन्य बड़ी कंपनी टाटा समूह की टाटा स्पांज आयरन ने भी अपने ब्लॉक में खनन में होने वाली देरी का पूरा ठीकरा सरकार पर फोड़ दिया। कंपनी की तरफ से यह बताया गया कि भूमि अधिग्रहण और वन मंजूरी देने में सरकारी एजेंसियों की तरफ से लगाई गई देरी की वजह से ही वह कोयला उत्पादन की निर्धारित सीमा से पिछड़ गई है। कंपनी के सीओओ उज्जवल चटर्जी ने कहा कि भूमि अधिग्रहण को लेकर कोर्ट में विवाद चले जाने से भी देरी हो रही है। टाटा स्पांज को संप्रग-एक सरकार ने वर्ष 2006 में उड़ीसा का एक कोयला ब्लॉक दिया था। इसमें उत्पादन वर्ष 2011 में शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक नहीं हो सका है। निजी क्षेत्र की भूषण स्टील ने आइएमजी को आश्वासन दिया है कि उसके कोयला ब्लॉक से अगले वर्ष से उत्पादन शुरू हो जाएगा। आर्सेलर-मित्तल के साथ मिलकर वर्ष 2008 में सरेगढ़ा कोयला ब्लॉक हासिल करने वाली जीवीके ने कहा है कि उसे जिस पावर प्लांट के लिए ये ब्लॉक दिए गए थे, उसका पहला चरण तैयार है। वैसे, इस ब्लॉक से उत्पादन तीन चार वर्षो बाद ही शुरू हो पाएगा, पावर प्लांट के शुरू होने से कंपनी को भरोसा है कि आवंटन रद नहीं होगा। सूत्रों का कहना है कि आइएमजी जिन 58 ब्लॉकों के आवंटन की फिलहाल समीक्षा कर रहा है, उनमें 35 से संबंधित परियोजनाएं भूमि अधिग्रहण, कानूनी विवाद और वन व पर्यावरण मंजूरी मिलने में देरी की वजह से लटकी हुई हैं। सिर्फ डेढ़ दर्जन ब्लॉकों से जुड़ी परियोजनाओं को लेकर निजी कंपनियों पर दोषारोपण किया जा सकता है कि उन्हें समय पर जान बूझकर उत्पादन में देरी की है। आइएमजी की बैठक शनिवार को भी होगी। अंतर मंत्रालयी समूह की रिपोर्ट के आधार पर ही कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल यह फैसला करेंगे कि कितने ब्लॉकों का आवंटन रद किया जाए।

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