Saturday, September 15, 2012

कोयला घोटाला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट


ठ्ठ जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में सरकार की मुसीबत बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट को आधार मानते हुए सरकार से कई चुभते सवाल पूछे। कोर्ट ने इस मामले में याचिका स्वीकार करने के लिए कैग की रिपोर्ट को अपर्याप्त बताने की केंद्र सरकार की दलील खारिज कर दी। सरकार को नोटिस जारी कर कोर्ट ने पूछा है कि कोयला खदानों के आवंटन में निर्धारित दिशा-निर्देशों और तय प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं। न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा और एआर दवे की पीठ ने वकील मनोहर लाल शर्मा की याचिका पर सरकार से आठ सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका में कोयला खदान आवंटन में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि जिन लोगों ने शर्तो का उल्लंघन किया उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो रही है और वे क्या बाधाएं थीं, जिनके चलते नीलामी के जरिये आवंटन करने की 2004 की नीति का पालन नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट की ओर से उठाए गए सवाल संप्रग सरकार के लिए बड़ी फजीहत का सबब बन सकते हैं। सरकार पहले ही विपक्षी दलों के सवालों का संतोषप्रद जवाब नहीं दे पा रही है। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल आर. नरीमन ने दलील दी कि याचिका कैग रिपोर्ट पर आधारित है। इस पर फिलहाल सुनवाई नहीं होनी चाहिए क्योंकि कैग रिपोर्ट पर अभी पीएसी विचार करेगी। पीठ ने उनकी दलील यह कहते हुए दरकिनार कर दी कि पीएसी और कोर्ट की सुनवाई में अंतर है। हम पीएसी या संसद के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं कर रहे। कोर्ट ने कहा, हम कैग रिपोर्ट की सत्यता नहीं परख रहे। हो सकता है कि कैग की रिपोर्ट अंतिम न हो। लेकिन, कैग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी रिपोर्ट का महत्व है। नरीमन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इसमें विभिन्न कानूनों के उल्लंघन की बात कहते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। जबकि, इस मामले की जांच पहले ही सीबीआइ को सौंपी जा चुकी है। इस पर पीठ ने कहा, याचिका के दो पहलू हैं। आपराधिक पहलू पर हम फिलहाल विचार नहीं कर रहे क्योंकि उसकी जांच सीबीआइ कर रही है। अभी तो हम 194 कोयला ब्लॉक के आवंटन पर विचार कर रहे हैं। देखेंगे कि तय प्रक्रिया और दिशा-निर्देशों का पालन हुआ है कि नहीं।


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