Friday, December 16, 2011

वापस लाओ काला धन

राजग के कार्यकारी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने बुधवार को सरकार से मांग की कि विदेशी बैंकों में जमा कथित रूप से 25 लाख करोड़ रु देश में वापस लाने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं और इस बारे में ेतपत्र जारी कर विदेशों में काला धन रखने वाले सभी लोगों के नाम भी बताए जाएं। लोकसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत काले धन पर चर्चा की शुरुआत करते हुए आडवाणी ने कहा, ‘सरकार काला धन रखने वालों की पूरी की पूरी सूची जारी करें। कोई भी नाम छिपाया नहीं जाना चाहिए। विदेशों में काला धन रखने वाले किसी व्यक्ति का बचाव न करें और अगर हमारा भी नाम हो तो भी उसे बताएं।उन्होंने कहा कि यह बात उनकी समझ से परे है कि सरकार को जब विदेशों में काला धन रखने वाले 600 से अधिक लोगों के नामों का पता चल गया है तो वह उन्हें देश को बताने में क्यों झिझक रही है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की उपस्थिति में भाजपा नेता ने कहा, ‘विदेशों में काला धन रखने वाले भारतीय लोगों से केवल कर लेकर बात खत्म नहीं कर देनी चाहिए, बल्कि ऐसे लोगों को दंडित किया जाना चाहिए।आडवाणी ने पूछा, सरकार ने अब तक विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन को वापस लाने के लिए क्या प्रयत्न किए हैं। आडवाणी ने कहा कि भाजपा के सभी सांसदों ने 9 दिसम्बर को भ्रष्टाचार विरोधी दिवस के अवसर पर संसद में हलफनामा दिया है कि विदेशों में उनका कोई अवैध खाता या संपत्ति नहीं है। उन्होंने सरकार से कहा कि वह ऐसा नियम बनाए जिसके तहत सभी सांसदों के लिए यह आवश्यक हो कि वे अपने अपने सदन में यह हलफनामा दें कि विदेशों में उसका कोई अवैध खाता या संपत्ति नहीं है। आडवाणी ने राजग शासन के दौरान विदेशों से काला धन वापस लाए जाने के प्रयास नहीं करने के आरोपों के संदर्भ में कहा, ‘कहा जाता है कि जब हम शासन में थे तो हमने क्यों नहीं किया। यह स्थिति पहले नहीं थी।उन्होंने यह भी जानना चाहा कि संयुक्त राष्ट्र की भ्रष्टाचार विरोधी संधि जब 2003 में अस्तित्व में आ चुकी थी तो सरकार ने उसका अनुमोदन करने में 2011 तक का विलंब क्यों किया। आडवाणी ने हवाला मामले में जेल में बंद हसन अली का उल्लेख करते हुए सरकार से जानना चाहा कि आखिर यह कौन व्यक्ति है और उसके किस-किस से संबंध हैं। भाजपा नेता ने सरकार से आग्रह किया कि वह जल्द से जल्द विदेशों में काला धन रखने वाले भारतीयों के नामों को उजागर करे, वरना ऐसा न हो कि हमें 2012 में उस शर्मनाक स्थिति का सामना करना न पड़े जब विकिलीक्स की ओर से जूलियन असांजे ऐसा कर दे। जिस वक्त आडवाणी काले धन पर अपनी बात रख रहे थे उस समय सदन में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी उपस्थित नहीं थे। बीजू जनता दल के भृतुहरि मेहताब ने देश को काले धन से बचाने की जरूरत पर बल दिया था। शिवसेना के अनंत गीते ने सरकार से जानना चाहा कि वह काले धन को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाने जा रही है। अन्नाद्रमुक के एम थंबिदुरई ने कहा कि काला धन रियल इस्टेट में बड़ी मात्रा में लगाया जा रहा है। तेलुगूदेशम पार्टी के एन नागेर राव ने कहा कि कालाधन पर नियंतण्रकी जिम्मेदारी सरकार की है और कांग्रेस सदस्य मनीष तिवारी के बयान से लगता है कि वह सरकार का बचाव कर रहे हैं । भाकपा के प्रबोध पांडा ने कहा कि अवैध खाताधारकों के नाम घोषित और उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं। ये चोरी का धन है -मुलायम : सपा के मुलायम सिंह यादव ने कहा, ‘काले धन को चोरी का धन कहना चाहिए। देश पर जितना कर्ज है, उसका दोगुना काला धन है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनेताओं पर काला धन रखने के आरोप लगते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि सबसे अधिक काला धन नौकरशाहों के पास है। मुलायम ने सदन में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की मौजूदगी में चुटकी ली, ‘ काला धन वापस लाओगे तो फिर सरकार बनाओगे।

है कितना रुपया, ये तो बताओ - शरद यादव : जद यू के शरद यादव ने कहा, ‘ इस देश का दुर्भाग्य देखिए कि अब तक ये पक्का नहीं है कि भारत का कितना धन कर चोरों की पनाहगाहों में है। फर्जी नाम घूम रहे हैं, मेरा नाम भी आया है - लालू : राजद के लालू प्रसाद ने कहा कि लोग फर्जी कागजात पेशकर काला धन विदेशी बैंकों में रखने वाले लोगों के नाम जारी कर रहे हैं, जिसमें गलत तरह से उनका भी नाम आया है। लालू के बयान के दौरान ही संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी सदन में पहुंचीं। इससे गरीबी दूर हो सकती है- बसपा : बसपा के दारा सिंह चौहान ने कहा कि 25 से 30 लाख करोड़ रु काला धन विदेश में जमा है, यह एक अनुमान है। लेकिन ऐसा कोई तथ्य नहीं है कि कितना काला धन विदेश में है। तीन साल में कई गुना हो गया-बासुदेव : मार्क्‍सवादी बासुदेव आचार्य ने कहा कि तीन साल पहले जहां 232 अरब डालर कालाधन था तो वहीं अब यह बढ़कर 462 अरब डालर यानी 20 लाख करोड़ रु तक पहुंच गया है।

Monday, December 5, 2011

एनआरएचएम की ठेकेदारी में उजागर हुए बड़े चेहरे

एनआरएचएम घोटाले की जांच के घेरे में आए ठेकेदार नमित टंडन के आत्महत्या के प्रयास के बाद भले ही परिजनों ने सीबीआइ पर उत्पीड़न के आरोप लगाए हों, लेकिन इस मसले ने एनआरएचएम की ठेकेदारी में शामिल बड़े लोगों का चेहरा भी उजागर कर दिया है। दरअसल, नमित टंडन ठेके में मोहरा मात्र थे। असली ठेकेदारी पीसीएफ के चेयरमैन, एमएलसी रामचंद्र प्रधान की पत्नी की फर्म पर उनके खास सहयोगी आगा रिजवान कर रहे थे। जांच एजेंसी नमित टंडन पर इन सबका नाम उजागर करने के लिए दबाव बना रही थी, लेकिन टंडन को मुंह खोलने का खामियाजा बखूबी मालूम था। रमा इंटरप्राइजेज के जरिए नमित टंडन ने जननी सुरक्षा योजना के तहत 27 एएनएम केंद्र बनवाने का काम पैक्सफेड से लिया। इस कार्य में श्रेया इंटरप्राइजेज भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार, काम दिलाने की भूमिका पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के सबसे करीबी पीसीएफ चेयरमैन और एमएलसी रामचंद्र प्रधान ने निभाई। प्रधान के करीबी आगा रिजवान इसमें माध्यम थे। सूत्रों के मुताबिक, 22 फरवरी 2010 से दिसंबर 2010 तक रमा इंटरप्राइजेज के खाते में एक करोड़ रुपये आए। नमित ने 50 लाख रुपये नकद और कई लोगों के नाम के चेक से 50 लाख रुपये आगा रिजवान को ही दे दिए। सीबीआइ को खबर मिली है कि पैसे रामचंद्र प्रधान को दिए गए। इस मामले में नमित से 28 नवंबर और 2 दिसंबर को पूछताछ की गई, तो सबसे बड़ा सवाल श्रेया इंटरप्राइजेज पर उठा। चूंकि पैसों का लेनदेन फर्म के नाम पर भी है, इसलिए सीबीआइ इनकी घेरेबंदी के लिए नमित की गवाही चाहती थी, लेकिन नमित पर प्रधान की फर्म का नाम नहीं लेने का दबाव था। एक तरफ सीबीआइ और दूसरी तरफ सत्ता पक्ष के दबंग नेताओं के दबाव में नमित परेशान हो गए। फिलहाल वह ट्रामा सेंटर में हैं। पीसीएफ चेयरमैन रामचंद्र प्रधान का कहना है कि मैं तो नमित टंडन को जानता ही नहीं हूं। आगा रिजवान मेरे परिचित हैं और उन्होंने मेरी पत्नी के फर्म पर कुछ काम किया था। मेरी हैसियत तो सबको पता है कि अगर मुझे काम करना रहता तो 50-100 करोड़ रुपये का करता। मैं एक करोड़ के काम के लिए ठेका करने नहीं जा सकता। मैंने एनआरएचएम में ठेके के लिए किसी अधिकारी को फोन भी नहीं किया। लिखा-पढ़ी में ली श्रेया फर्म : रिजवान आगा रिजवान ने कहा कि मेरे पास कोई फर्म नहीं थी। इसलिए मैंने रामचंद्र प्रधान की पत्नी अनीता प्रधान की फर्म से काम किया और यह फर्म बाकायदा लिखा-पढ़ी में ली है। रमा इंटरप्राइजेज भी हमने ही बनवाई। नमित मेरे दोस्त हैं। शुरू में मैं उनका मौखिक पार्टनर था, लेकिन बाद में लिखित तौर पर मैं उनका बराबर का पार्टनर बन गया। रमा फर्म के अस्तित्व में आने के बाद श्रेया से काम करना बंद कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि काम के सभी रिकार्ड दुरुस्त हैं।

Friday, December 2, 2011

एयरटेल पर तीन करोड़ का जुर्माना रीजनल मैनेजर सहित चार गिरफ्तार

भारत-नेपाल सीमा से सटे जनपद तुलसीपुर में फर्जी आईडी लगाकर एक्टीवेट किये गये 607 सिम बरामद कर पुलिस ने सात लोगों के विरुद्ध कूटरचित दस्तावेज बनाने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर एयरटेल कम्पनी के रीजनल मैनेजर सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है तथा फर्जी आईडी लगाकर एक्टीवेट किये जाने के आरोप में दूरसंचार अधिनियम के तहत टेलीकाम अथारटी से तीन करोड़ तीन लाख 50 हजार रुपये के जुर्माने की संस्तुति की है। जनपद में काफी समय से फर्जी आईडी बनाकर सिम एक्टीवेट करने का कार्य किया जा रहा था। जिसके लिए फर्जी मोहरें व फोटो भी बनायी जाती थीं। इन फर्जी आईडी से एक्टीवेट सिमों को कुछ ऐसे संदिग्ध कायरे में इस्तेमाल किया गया था जो प्रदेश पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था। एक बम विस्फोट काण्ड में यहीं से एक्टीवेट सिमो के इस्तेमाल होने की सूचना पर शुरू की गई कार्रवाई में इस फर्जी वाड़े का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस अधीक्षक आकाश कुलहरि के निर्देश पर एसओजी ने स्टार इलेक्ट्रानिक हरैय्या चौराहा तुलसीपुर पर दबिश डालकर 507 एयरटेल के एक्टीवेट सिम तथा 100 वोडाफोन के शील्ड सिम बरामद कर दुकान मालिक अजय श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया। सिमों की जांच करने पर मुख्यालय स्थित एयरटेल डिस्ट्रीब्यूटर किसान सेवा केन्द्र व एयरटेल कम्पनी के रीजनल मैनेजर की संलिप्ता सामने आयी। पुलिस ने किसान सेवा केन्द्र पर छापामारकर 400 फर्जी आईडी कार्ड , 7 फर्जी मोहरें व लगभग एक दर्जन फर्जी लागबुक बरामद किया गया। इस प्रकरण में किसान सेवा केन्द्र के मालिक सोमेन्द्र विक्रम सिंह व एयरटेल के रीजनल मैनेजर अभिनव श्रीवास्तव को मुख्य मुल्जिम बनाते हुए, अजय श्रीवास्तव, पाटेरी प्रसाद वर्मा, निवासी माधवडीह तुलसीपुर, राजकुमार कसेरा निवासी बलरामपुर सहित सात लोगों के विरूद्ध 419,420 120 बी़ 471 ,467,468 के तहत तुलसीपुर थाने में एफआईआर दर्ज किया गया है।

पांच करोड़ रुपये के गबन में 15 के खिलाफ मामला दर्ज नागपुर

महाराष्ट्र के नागपुर में एक निजी स्कूल के शिक्षकों समेत 15 लोगों के खिलाफ 5.17 करोड़ रुपये के गबन के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों में शिक्षा अधिकारी केएम चौधरी और उनके सहयोगी एसटी केदार, एस फर्कादे और अर्चना हजारे शामिल हैं। वर्ष 1979 और वर्ष 2010 के बीच एक सेवानिवृत्त महिला प्रधानाचार्य और उसके भाई (स्कूल के क्लर्क) ने जिला शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर सेवानिवृत्त शिक्षकों के फर्जी हस्ताक्षर कर उनकी तनख्वाह हड़प ली। दोनों ने इस दौरान अयोग्य शिक्षकों की भर्ती कर धन की हेराफेरी भी की। इमामबाड़ा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

और भ्रष्ट हुआ भारत

भ्रष्टाचार से लड़ने के भारत सरकार के खोखले दावों की गुरुवार को तब और पोल खुल गई जब ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने भ्रष्ट देशों की सूची जारी कर यह बताया कि भारत आठ पायदान खिसककर भ्रष्टतम देशों की ओर बढ़ गया है। पिछले वर्ष इस सूची में 87वें स्थान पर रहे भारत को इस बार 95वां स्थान मिला है। इसका मतलब है कि वह और भ्रष्ट हो रहा है। भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल की चर्चा के बीच सामने आई ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की सूची भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर बट्टा लगाने वाली है, क्योंकि सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह भ्रष्टाचार का सख्ती से सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है। भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष के मामले में इस साल भारत को 10 अंकों में केवल 3.1 अंक ही मिल सके। 2007 में भारत 3.5 अंकों के साथ 72वें स्थान पर था। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इस आधार पर भ्रष्ट देशों की रैकिंग करती है कि किसी भी देश में कोई भी सार्वजनिक उपक्रम लोगों के बीच कितना भ्रष्ट समझा जाता है और विभिन्न विशेषज्ञ उस देश में भ्रष्टाचार के बारे में क्या राय रखते हैं? भारत की यह दागदार छवि विश्व बैंक संबंद्ध देश प्रदर्शन और संस्थागत आंकलन, विश्व आर्थिक मंच कार्यकारी आंकलन और वैश्विक राष्ट्रीय जोखिम मूल्यांकन समेत 13 संस्थाओं की अध्ययन रिपोर्ट और सर्वेक्षण के आधार पर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक न्यजीलैंड 9.5 अंक के साथ पहले स्थान पर है। फिनलैंड और डेनमार्क क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वीडन चौथे, सिंगापुर पांचवें, ब्रिटेन 16वें, अमेरिका 24 वें, चीन 75वें, श्रीलंका 86वें, बांग्लादेश 120वें, पाकिस्तान 134वें स्थान पर है। सोमालिया, उत्तरी कोरिया, म्यांमार और अफगास्तिान जैसे देश अग्रणी हैं, जो अस्थिर सरकारों और गृहयुद्ध जैसे हालात से जूझ रहे हैं। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत का गलत नक्शा पेश किया है। इस नक्शे में गुलाम कश्मीर को भारत का हिस्सा न दिखाते हुए पाकिस्तान में दिखाया गया है।