राजग के कार्यकारी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने बुधवार को सरकार से मांग की कि विदेशी बैंकों में जमा कथित रूप से 25 लाख करोड़ रु देश में वापस लाने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं और इस बारे में ेतपत्र जारी कर विदेशों में काला धन रखने वाले सभी लोगों के नाम भी बताए जाएं। लोकसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत काले धन पर चर्चा की शुरुआत करते हुए आडवाणी ने कहा, ‘सरकार काला धन रखने वालों की पूरी की पूरी सूची जारी करें। कोई भी नाम छिपाया नहीं जाना चाहिए। विदेशों में काला धन रखने वाले किसी व्यक्ति का बचाव न करें और अगर हमारा भी नाम हो तो भी उसे बताएं।’ उन्होंने कहा कि यह बात उनकी समझ से परे है कि सरकार को जब विदेशों में काला धन रखने वाले 600 से अधिक लोगों के नामों का पता चल गया है तो वह उन्हें देश को बताने में क्यों झिझक रही है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की उपस्थिति में भाजपा नेता ने कहा, ‘विदेशों में काला धन रखने वाले भारतीय लोगों से केवल कर लेकर बात खत्म नहीं कर देनी चाहिए, बल्कि ऐसे लोगों को दंडित किया जाना चाहिए।’ आडवाणी ने पूछा, सरकार ने अब तक विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन को वापस लाने के लिए क्या प्रयत्न किए हैं। आडवाणी ने कहा कि भाजपा के सभी सांसदों ने 9 दिसम्बर को भ्रष्टाचार विरोधी दिवस के अवसर पर संसद में हलफनामा दिया है कि विदेशों में उनका कोई अवैध खाता या संपत्ति नहीं है। उन्होंने सरकार से कहा कि वह ऐसा नियम बनाए जिसके तहत सभी सांसदों के लिए यह आवश्यक हो कि वे अपने अपने सदन में यह हलफनामा दें कि विदेशों में उसका कोई अवैध खाता या संपत्ति नहीं है। आडवाणी ने राजग शासन के दौरान विदेशों से काला धन वापस लाए जाने के प्रयास नहीं करने के आरोपों के संदर्भ में कहा, ‘कहा जाता है कि जब हम शासन में थे तो हमने क्यों नहीं किया। यह स्थिति पहले नहीं थी।’ उन्होंने यह भी जानना चाहा कि संयुक्त राष्ट्र की भ्रष्टाचार विरोधी संधि जब 2003 में अस्तित्व में आ चुकी थी तो सरकार ने उसका अनुमोदन करने में 2011 तक का विलंब क्यों किया। ‘आडवाणी ने हवाला मामले में जेल में बंद हसन अली का उल्लेख करते हुए सरकार से जानना चाहा कि आखिर यह कौन व्यक्ति है और उसके किस-किस से संबंध हैं। भाजपा नेता ने सरकार से आग्रह किया कि वह जल्द से जल्द विदेशों में काला धन रखने वाले भारतीयों के नामों को उजागर करे, वरना ऐसा न हो कि हमें 2012 में उस शर्मनाक स्थिति का सामना करना न पड़े जब विकिलीक्स की ओर से जूलियन असांजे ऐसा कर दे। जिस वक्त आडवाणी काले धन पर अपनी बात रख रहे थे उस समय सदन में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी उपस्थित नहीं थे। बीजू जनता दल के भृतुहरि मेहताब ने देश को काले धन से बचाने की जरूरत पर बल दिया था। शिवसेना के अनंत गीते ने सरकार से जानना चाहा कि वह काले धन को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाने जा रही है। अन्नाद्रमुक के एम थंबिदुरई ने कहा कि काला धन रियल इस्टेट में बड़ी मात्रा में लगाया जा रहा है। तेलुगूदेशम पार्टी के एन नागेर राव ने कहा कि कालाधन पर नियंतण्रकी जिम्मेदारी सरकार की है और कांग्रेस सदस्य मनीष तिवारी के बयान से लगता है कि वह सरकार का बचाव कर रहे हैं । भाकपा के प्रबोध पांडा ने कहा कि अवैध खाताधारकों के नाम घोषित और उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं। ये चोरी का धन है -मुलायम : सपा के मुलायम सिंह यादव ने कहा, ‘काले धन को चोरी का धन कहना चाहिए। देश पर जितना कर्ज है, उसका दोगुना काला धन है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनेताओं पर काला धन रखने के आरोप लगते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि सबसे अधिक काला धन नौकरशाहों के पास है। मुलायम ने सदन में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की मौजूदगी में चुटकी ली, ‘ काला धन वापस लाओगे तो फिर सरकार बनाओगे।’
Friday, December 16, 2011
वापस लाओ काला धन
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