Monday, May 28, 2012

एनआरएचएम : उप्र में हुई घटिया दवा की सप्लाई

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में अनियमितताओं की जांच कर रही सीबीआई को दवा वितरण में भारी गड़बड़ी मिली है। जांच में पाया गया कि सरकारी कंपनियों की दवा के नाम पर लोकल व घटिया दवा देकर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया गया। उत्तर प्रदेश में करीब एक हजार करोड़ से अधिक की दवा की सप्लाई की गई। सीबीआई ने जांच में पाया कि दवा आपूर्ति करने वाले डीलर तो कंपनी से अधिकृत थे मगर उन्होंने जो दवा की आपूर्ति की वो लोकल थी। सीबीआई ने जांच में पाया कि कंपनी के अधिकृत डीलर ने कुछ दवाओं पर कंपनी का ठप्पा लगा दिया था। सीबीआई ने जांच में पाया कि लखनऊ के एक कंपनी के अधिकृत दवा डीलर ने 35 लाख की दवा खरीदी और एक करोड़ से ज्यादा कमाया। जांच में यह भी मिला कि उक्त डीलर ने कंपनी के नाम से मिलते जुलते नाम पर बैंक में खाता खोल लिया। सीबीआई ने दवा निर्माता कंपनियों के अधिकारियों से पूछताछ की। उनसे कुछ दवाओं की आपूर्ति के बारे में पूछा तो कंपनियों के अधिकारियों ने कहा कि वे इस तरह की दवा बना ही नहीं रहे हैं। कोलकाता की एक दवा निर्माता कंपनी से सीबीआई ने लखनऊ में बैंक खाते खोलने की बात पूछी तो उसने कहा कि वहां उसने कोई खाता नहीं खोला है। उधर सीबीआई अब चार हजार करोड़ के जननी सुरक्षा, बंध्याकरण जैसे मामले की जांच में जुट गई है। जननी सुरक्षा योजना के तहत स्वास्थ्य केन्द्र में बच्चा पैदा करने वाली महिलाओं को 1400 रु पए दिए जाने थे जबकि बीपीएल परिवार की महिलाओं को घर पर भी प्रसव की स्थिति में 500 रु पए की नकद सहायता दी जानी थी। यूपी में 2005-11 के बीच इस योजना के तहत 69 लाख महिलाओं के लिए 1219 करोड़ रु पए खर्च किए गए। राज्य सरकार को कार्यक्रम कार्यन्वयन योजना के तहत इस योजना के 10 प्रतिशत मामलों की पुष्टि करनी थी कि सच में प्रसव हुआ है या नहीं और हुआ है तो पैसा दिया गया है या नहीं। सीएजी ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि इस मिशन के तहत सौभाग्यवती सुरक्षित मातृत्व योजना की शुरु आत राज्य में मई 2008 में हुई। इस योजना के तहत बीपीएल परिवार की महिलाओं का प्रसव कराने वाले निजी र्नसंिग होम को प्रति डिलीवरी 1850 रु पए मिलने थे। इस योजना के तहत भी भारी घपले किए गए। उदाहरण के तौर पर बहराइच में राज अस्पताल को 258 बीपीएल महिलाओं का प्रसव कराने के लिए 6.77 लाख रु पए दिए गए लेकिन किसी महिला से बीपीएल का दस्तावेज नहीं लिया गया जो कि जरूरी था। सीएजी की रिपरेट के अनुसार 2005-11 के बीच 26 लाख लोगों की नसबंदी व बंध्याकरण किया गया। इस पर नकद सहायता के रूप में 181 करोड़ रु पए खर्च किए गए। मिर्जापुर के चुन्नार में 10.81 लाख रु पए 1518 पुरु षों को दिए गए लेकिन भुगतान रजिस्टर में न तो इनका अंगूठा लिया गया और न ही दस्तखत करवाए गए। जहां अंगूठा या दस्तखत लिया गया वहां राशि नहीं लिखी गई। गोरखपुर के जिला महिला अस्पताल में इस मद में 10.38 लाख खर्च किए गए लेकिन कोई बही-खाता नहीं बनाया गया।

घोटालों में माया से होड़ ले रहा केंद्र

संप्रग-2 की सालगिरह के जश्न में मुलायम सिंह भले ही शरीक हुए हों, लेकिन सपा प्रधानमंत्री और उनकी सरकार पर हमला बोलने में मुरव्वत बरतने को तैयार नहीं है। सपा महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने कहा, प्रधानमंत्री खुद कोई फैसला नहीं ले सकते। फैसले कोई और लेता है। घोटालों के मामले में संप्रग सरकार यूपी की पूर्ववर्ती माया सरकार से होड़ लेने में लगी है कि किसका घोटाला ज्यादा बड़ा है। प्रो. यादव ने कहा कि संप्रग सरकार का आलम यह है कि, एक घोटाले पर चर्चा बंद नहीं होती कि दूसरा सामने आ जाता है। 2जी घोटाला 1.76 लाख करोड़ का था तो सीएजी की रिपोर्ट के हवाले से कोयला आवंटन में 1.90 लाख करोड़ का घोटाला उजागर हुआ है। वह भी सिर्फ निजी कंपनियों के लिए। यदि इसमें सरकारी कंपनियों को भी जोड़ दिया जाए तो यह 10 लाख करोड़ तक जा सकता है। यूपी में इन दिनों कोई भी अधिकारी सरकारी फाइलों का एक पन्ना पलटता है तो एक नया घोटाला सामने आ जाता है। सपा महासचिव ने बुधवार को दिल्ली नगर निगम में जीते पार्टी सभासदों के स्वागत समारोह में कहा, देश की स्थिति बहुत खराब है। 1991 जैसी नौबत है, जब कर्ज लेने के लिए सोना गिरवी रखना पड़ा था। डालर के मुकाबले रुपये की कीमत तेजी से गिर रही है। सिर्फ यूपी में गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर लगभग 5000 करोड़ बकाया है। केंद्र चीनी निर्यात का फैसला कर ले तो किसानों का भुगतान हो सकता है, लेकिन निर्णय नहीं हो रहा है। पीएम व कैबिनेट फैसले नहीं ले सकती तो देश का यही हश्र होगा। एयर इंडिया के पायलटों को वेतन देने को धन नहीं है। पिछले उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने फायदे वाले सभी हवाई रूटों पर निजी कंपनियों के जहाज लगवा दिए। इसी तरह हवाई जहाजों की जरूरत न होने के बावजूद सिर्फ कमीशनखोरी के लिए जहाज खरीदे गए।

डायल को कौडि़यों के भाव दी खरबों की जमीन

2जी से बड़े 1.8 लाख करोड़ रुपये के कोल घोटाले पर संसद में हुए जबर्दस्त हंगामे के ठीक एक दिन बाद बुधवार को कैग की एक मसौदा रिपोर्ट ने दिल्ली एयरपोर्ट का घोटाला उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक उड्डयन मंत्रालय और एयरपोर्ट अथॉरिटी ने दिल्ली इंटरनेशनल एयरपो‌र्ट्स लिमिटेड (डायल) को खरबों की जमीन कौडि़यों के भाव लीज पर दे दी। मूल करार में बदलाव के जरिये की गई इस कृपा से सरकारी खजाने को सीधे-सीधे 24 हजार करोड़ रुपये का चूना लगा है। डायल को इससे डेढ़ लाख करोड़ से भी अधिक का फायदा पहंुचा है। नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के मुताबिक डायल को 60 साल के लिए सिर्फ 100 रुपये सालाना के लीज रेंट पर 4,609 एकड़ जमीन दे दी गई। डायल इससे 1,63,557 करोड़ रुपये तक की कमाई कर सकती है। यही नहीं, वाणिज्यिक उपयोग के लिए 24 हजार करोड़ रुपये मूल्य की 190 एकड़ अतिरिक्त जमीन भी महज 31 लाख रुपये में दे दी गई। इसके अलावा डायल को समझौते से इतर एयरपोर्ट विकास शुल्क वसूलने की इजाजत भी दे दी गई। कैग की यह रिपोर्ट अभी संसद में पेश होनी है। इसमें कहा गया है कि अतिरिक्त 190 एकड़ जमीन के लिए केवल 6.19 करोड़ रुपये लिए गए। जबकि मूल करार में 4799 (4609 190 मिलाकर) एकड़ की संपूर्ण जमीन में पांच फीसद यानी 240 एकड़ का वाणिज्यिक गतिविधियों में इस्तेमाल करने का प्रावधान था। खुद डायल ने मूल एग्रीमेंट में 58 साल के कन्सेशन पीरियड में इस जमीन की प्रति एकड़ प्रति वर्ष लाइसेंस फीस 681.63 करोड़ रुपये रखी थी। इसके तहत 240 एकड़ जमीन के लिए डायल को अब तक 1,63,557 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता। मेरिल लिंच के नए मूल्यांकन के मुताबिक डायल के पास मौजूद वाणिज्यिक उपयोग की जमीन का दाम 100 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से 24 हजार करोड़ बैठता है। डायल को एयरपोर्ट विकास शुल्क की अनुमति भी एग्रीमेंट के बाद दी गई है। इस तरह मात्र 2450 करोड़ रुपये की इक्विटी लगाकर डायल ने 60 साल के लिए एक तैयार एयरपोर्ट और 24 हजार करोड़ की कामर्शियल संपत्ति प्राप्त कर ली है।

Wednesday, May 23, 2012

मायावती के बंगले तक पहुंची घोटाले की आंच

उत्तर प्रदेश में पार्को व उद्यान के बाद अब हाथी घोटाले की आंच मायावती के बंगले तक पहुंच गई है। पूर्व मुख्यमंत्री आवास व भीमराव अंबेडकर परिवर्तन स्थल में हाथी लगवाने वालों ने 3.5 करोड़ का घोटाला किया है। राजस्थान के एक कारीगर ने इस मामले में हाथी लगवाने वाली दो कंपनियों के खिलाफ विभूतिखंड थाने में रकम हड़पने और जान से मारने की धमकी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। राजस्थान के दौसा स्थित बेरावंडा सिकराय तहसील के गलोल्या निवासी राम औतार सनी मूर्तियों के कारीगर हैं। राम औतार के मुताबिक उन्होंने भीमराव अंबेडकर परिवर्तन स्थल में 20 हाथी (दस बड़े व दस छोटे) लगाए थे। माल एवेन्यू स्थित मायावती के बंगले में भी सात छोटे हाथी लगाए थे। बसपा कार्यालय कांशीराम स्मारक स्थल, भीमराव अंबेडकर परिवर्तन स्थल, गोमतीनगर स्थित अंबेडकर पार्क-4 में भी फिनिशिंग का कार्य किया था। अंबेडकर परिवर्तन स्थल में हाथी लगाने का कार्य अलीगंज स्थित अनुराग ग्रेनाइट्स इंडस्ट्रीज के मालिक जितेंद्र मिश्रा के साथ किया। मायावती के आवास में आगरा स्थित जेके टाइल्स के साथ मिलकर हाथी मूर्ति लगाई थी। तीन सालों में 500 मजदूरों को लाकर 6.21 करोड़ का कार्य किया था। इसमें जेके टाइल्स से उन्हें 53 लाख मिलना था, लेकिन मिले सिर्फ 20 लाख रुपये। इसी तरह अनुराग ग्रेनाइट्स इंड्रस्ट्रीज के मालिक जितेंद्र ने भी उनके 3.5 करोड़ रुपये हड़प लिए। जब रकम मांगी तो उन्हें जितेंद्र ने चेक दिए, जो बाउंस हो गए। उसके बाद रकम देने के लिए लखनऊ बुलाया और एक पुलिस अधिकारी के इशारे पर हजरतगंज कोतवाली में बंधक बनाकर पिटवाया। उनके मैनेजर अशोक कुमार से सभी मूल दस्तावेज छीन लिए और सादे कागजात व स्टांप पेपरों पर दस्तखत करा लिए और जान से मारने की धमकी दी। मादक पदार्थ रखने में जेल भिजवाने की भी बात कही।

भूमि घोटाले में येद्दयुरप्पा के खिलाफ चार्जशीट

अवैध खनन मामले में सीबीआइ जांच का सामना कर रहे कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दयुरप्पा की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। लोकायुक्त पुलिस ने सोमवार को भूमि घोटाले के एक मामले में येद्दयुरप्पा व पूर्व उद्योग मंत्री कट्टा सुब्रमान्या नायडू के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया। दोनों पर मनमाने तरीके से 20 एकड़ भूमि गैर अधिसूचित करने को लेकर आपराधिक मामला दर्ज था। विशेष लोकायुक्त अदालत ने जाली दस्तखत के आधार पर एक औद्योगिक स्थल का आवंटन रद करने संबंधी शिकायत के एक अन्य मामले में येद्दयुरप्पा व उद्योग मंत्री मुरुगेश निरानी के खिलाफ जांच का आदेश भी जारी कर दिया। लोकायुक्त पुलिस के एसपी पीके शिवशंकर ने बताया कि येद्दयुरप्पा और कट्टा के खिलाफ भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया है। आरोप पत्र के मुताबिक येद्दयुरप्पा ने 2008 में मुख्यमंत्री रहते हुए पद का दुरुपयोग कर मनमाने ढंग से कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास परिषद (केआइएडीबी) द्वारा देवनहल्ली के निकट विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) बनाने के लिए अधिग्रहीत की गई 20 एकड़ भूमि को गैर अधिसूचित कर दिया था, जो कि अंग्रेजी और कन्नड़ भाषा के अग्रणी समाचार पत्र के मालिकों से संबंधित थी। इसके चलते सरकार को विकास व सेवा कर के रूप में 8.64 करोड़ की क्षति हुई। वहीं उद्योगपति आलम पाशा की शिकायत पर न्यायाधीश एन के सुधींद्र राव ने येद्दयुरप्पा और उद्योग मंत्री मुरुगेश निरानी के खिलाफ जांच कर 27 जून तक रिपोर्ट सौंपने को कहा है। पाशा का आरोप है कि केआइएडीबी ने उद्योग लगाने के लिए उन्हें 26 एकड़ भूमि दी थी। येद्दयुरप्पा-निरानी ने उसे जाली पत्र बताकर आवंटन रद कर दिया था। हालांकि चौतरफा घिरे येद्दयुरप्पा के भाजपा नेताओं के खिलाफ तेवर ढीले नहीं पड़े है। येद्दयुरप्पा ने पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के बयान कर्नाटक में स्थान खाली कहां है को अवांछित बताते हुए सोमवार को कहा कि उन्होंने कभी पार्टी या मुख्यमंत्री पद के लिए दुहाई नहीं दी थी। येद्दयुरप्पा ने कहा कि वह राजनाथ को पत्र लिख नाराजगी जताएंगे। राजनाथ ने कनार्टक में भाजपा नेतृत्व में परिवर्तन न होने के संकेत देते हुए कहा था कि कहां रिक्त स्थान है? डीवी सदानंद गौड़ा कर्नाटक में हमारे मुख्यमंत्री हैं।