2जी से बड़े 1.8 लाख करोड़ रुपये के कोल घोटाले पर संसद में हुए जबर्दस्त हंगामे के ठीक एक दिन बाद बुधवार को कैग की एक मसौदा रिपोर्ट ने दिल्ली एयरपोर्ट का घोटाला उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक उड्डयन मंत्रालय और एयरपोर्ट अथॉरिटी ने दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स लिमिटेड (डायल) को खरबों की जमीन कौडि़यों के भाव लीज पर दे दी। मूल करार में बदलाव के जरिये की गई इस कृपा से सरकारी खजाने को सीधे-सीधे 24 हजार करोड़ रुपये का चूना लगा है। डायल को इससे डेढ़ लाख करोड़ से भी अधिक का फायदा पहंुचा है। नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के मुताबिक डायल को 60 साल के लिए सिर्फ 100 रुपये सालाना के लीज रेंट पर 4,609 एकड़ जमीन दे दी गई। डायल इससे 1,63,557 करोड़ रुपये तक की कमाई कर सकती है। यही नहीं, वाणिज्यिक उपयोग के लिए 24 हजार करोड़ रुपये मूल्य की 190 एकड़ अतिरिक्त जमीन भी महज 31 लाख रुपये में दे दी गई। इसके अलावा डायल को समझौते से इतर एयरपोर्ट विकास शुल्क वसूलने की इजाजत भी दे दी गई। कैग की यह रिपोर्ट अभी संसद में पेश होनी है। इसमें कहा गया है कि अतिरिक्त 190 एकड़ जमीन के लिए केवल 6.19 करोड़ रुपये लिए गए। जबकि मूल करार में 4799 (4609 व 190 मिलाकर) एकड़ की संपूर्ण जमीन में पांच फीसद यानी 240 एकड़ का वाणिज्यिक गतिविधियों में इस्तेमाल करने का प्रावधान था। खुद डायल ने मूल एग्रीमेंट में 58 साल के कन्सेशन पीरियड में इस जमीन की प्रति एकड़ प्रति वर्ष लाइसेंस फीस 681.63 करोड़ रुपये रखी थी। इसके तहत 240 एकड़ जमीन के लिए डायल को अब तक 1,63,557 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता। मेरिल लिंच के नए मूल्यांकन के मुताबिक डायल के पास मौजूद वाणिज्यिक उपयोग की जमीन का दाम 100 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से 24 हजार करोड़ बैठता है। डायल को एयरपोर्ट विकास शुल्क की अनुमति भी एग्रीमेंट के बाद दी गई है। इस तरह मात्र 2450 करोड़ रुपये की इक्विटी लगाकर डायल ने 60 साल के लिए एक तैयार एयरपोर्ट और 24 हजार करोड़ की कामर्शियल संपत्ति प्राप्त कर ली है।
Monday, May 28, 2012
डायल को कौडि़यों के भाव दी खरबों की जमीन
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