2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक में दूरसंचार मंत्रालय के एक प्रजेंटेशन में आधे से ज्यादा हिस्से में राजग कार्यकाल के दौरान हुए घाटे का ही लेखा-जोखा पेश किए जाने से न केवल गड़े मुर्दे उखाड़े जाने की आशंका बढ़ गई, बल्कि समिति में तनातनी भी पैदा हो गई। इस प्रस्तुति को देखकर राजग सदस्यों ने विरोध जताया और खासकर तब जब कानून के शिकंजे में आए पूर्व मंत्री ए. राजा पर सीएजी की सख्त रिपोर्ट का हवाला आनन-फानन में निपटा दिया गया। राजग सदस्यों के विरोध के बाद अब सीएजी की नवीनतम रिपोर्ट को भी जेपीसी दस्तावेज का हिस्सा बनाने का फैसला हुआ है। जबकि भाजपा नेता यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह ने समिति के सामने गवाही देने का भी प्रस्ताव दे दिया है। जेपीसी की अगली बैठक 30 मई को होगी जिसमें सीएजी से बात की जाएगी। गवाही 29 जून से होगी। गुरुवार को जेपीसी के दूसरे दिन की बैठक शुरू हुई तो दूरसंचार मंत्रालय के सचिव ने लगभग 80 पेज की प्रस्तुति दी। बताते हैं कि 1998-08 तक की इस रिपोर्ट में लगभग 50 पेज राजग कार्यकाल पर थे। ए.राजा की कहानी महज एक दो पन्नों तक सीमित थी। प्रजेंटेशन में सीएजी की हालिया रिपोर्ट का भी जिक्र नहीं किया गया। इस पर राजग सदस्य बिफर पड़े। बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष पीसी चाको ने बताया कि उन्होंने सीएजी रिपोर्ट के सारांश को भी जेपीसी दस्तावेज का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया है। उसी गहमागहमी में यशवंत सिंहा ने गवाही देने का भी प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि जसवंत सिंह भी गवाही देने के लिए तैयार हैं। बैठक में 10वीं पंचवर्षीय योजना और दूर संचार मंत्रालय पर भी चर्चा हुई। यह बताने की कोशिश हुई कि पूरी नीति दूर संचार के विस्तार की थी न कि राजस्व बढ़ाने की। माइग्रेशन पैकेज और उसके कारण हुए घाटे पर भी चर्चा हुई। यह तय हुआ कि जांच के पूरे काल में स्पेक्ट्रम के बाबत हुए कैबिनेट निर्णय समेत दूसरे संबंधी फैसलों के दस्तावेज मंगाए जाएं। यह जानने की भी कोशिश होगी कि रक्षा मंत्रालय को दिए गए स्पेक्ट्रम को जारी करने की कितनी जरूरत थी। बैठक में ट्राइ के अध्यक्ष जेएस शर्मा को बुलाया गया। सीबीआइ को सात जून को बुलाया गया है जबकि आठ जून को वित्त मंत्रालय के सचिव अपना प्रजेंटेशन देंगे। 29 जून से गवाही का काम शुरू होगा। राजग काल में सलाह देने वाले सोली सोराबजी को गवाही के लिए बुलाने की घोषणा पहले ही हो चुकी है। बाकियों के नाम अभी तय किए जा रहे हैं। यशवंत की गवाही के प्रस्ताव के बाबत पूछे गए सवाल को चाको ने फिलहाल टाल दिया। दूरसंचार से जुड़े मुद्दों पर गठित मंत्रियों के समूह का नेतृत्व करने वाले यशवंत ने टेलीकाम परिचालकों के लिए तयशुदा लाइसेंस शुल्क नीति के स्थान पर राजस्व हिस्सेदारी मॉडल अपनाए जाने से जुड़े विषय में स्वयं को गवाह के तौर पर उपस्थित होने की पेशकश की।
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