2जी स्पेक्ट्रम मामले की धीमी जांच पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने आयकर विभाग को आड़े हाथों लिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि मामला 2008 में संज्ञान में आया और विभाग ने वास्तविक जांच मार्च 2011 में शुरू की। अगर कोर्ट ने दखल नहीं दिया होता तो विभाग सोता रहता। जांच के दायरे में आई कंपनियों को बड़ी कहने पर एतराज जताते हुए न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी व एके गांगुली की पीठ ने कहा, इन्हें बड़ी कह कर इस शब्द का अपमान मत करिए। ये प्रथम दृष्टया कर चोरी कीआरोपी हैं। इससे पहले आयकर विभाग ने सील बंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट पेश की। विभाग की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विवेक तंखा ने अब तक हुई जांच का ब्योरा दिया, लेकिन कोर्ट विभाग की जांच से संतुष्ट नहीं हुआ। पीठ ने राडिया टेप रिकार्डिग के आधार पर हुई जांच का ब्योरा मांगा। आयकर विभाग कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाया, पर तंखा ने यह जरूर कहा, प्रत्येक बातचीत लेनदेन में तब्दील नहीं हुई। वैसे भी आयकर विभाग आपराधिक कार्यवाही नहीं करता, वह सिर्फ टैक्स प्रावधानों के तहत कार्यवाही करता है। जब गैर सरकारी संगठन सीपीआइएल के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह जांच भी कोर्ट के स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश के बाद हुई है तो पीठ ने उनसे सहमति जताई।
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