पंजाब सरकार द्वारा डीबीडब्लू -170 गेहूं बीज पर दी गई 27 करोड़ की सब्सिडी किसानों तक नहीं पहुंची। बीज वितरण एजेंसी और योजना से जुड़े अफसरों ने साठगांठ कर किसानों की फर्जी सूची तैयार कर सब्सिडी हजम कर ली। 2010-11 में हुए इस घोटाले में ऐसे कारनामे हुए हैं कि विधानसभा समिति की टीम ने दांतों तले अंगुलियां दबा ली। सब्सिडी हासिल करने के लिए अंगूठाछाप शख्स से अंग्रेजी में हस्ताक्षर करवा लिए गए। बीज विक्रय एजेंसी ने एक ऐसे व्यक्ति को बीज देना दिखा दिया गया जो खेती करता ही नहीं। विधानसभा समिति द्वारा बद्दोवाल गांव के दौरे और किसानों से बातचीत में इस गोरखधंधे का खुलासा हुआ। विस समिति के चेयरमैन विरसा सिंह वल्टोहा की अगुआई में टीम ने गत दिवस बचत भवन में विभिन्न जिलों के कृषि व सीड एजेंसी अधिकारियों के संग बैठक कर इस बारे में जानकारी हासिल की। इसके बाद बद्दोवाल और पमाल गांव में किसानों से बातचीत की, तो पता चला कि डीलर ने दोनों गांवों में सिर्फ दो लोगों को ही बीज दिया। वल्टोहा ने बताया कि सूची में तीन गांवों बद्दोवाल, गांव पमाल और गांव ललतों कलां शामिल हैं। इसके साथ अन्य गांवों में वितरित बीज मामले की भी समीक्षा जारी है। समिति ने इससे पहले बठिंडा तथा श्री मुक्तसर साहिब में पहुंच कर जांच की और वहां भी अनियमितताएं मिली हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में हुए गेहूं बीज सब्सिडी घोटाले को विधानसभा के बजट सत्र में सुनील जाखड़ ने उठाया था। इस संदर्भ में कृषि मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह सदन में संतोषजनक जबाव नहीं पेश कर पाए थे। विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने दो सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए। 2009-10 के लिए गेहूं बीज पर दी गई 54 करोड़ रुपये की सब्सिडी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य के विपक्षी दल 54 करोड़ सब्सिडी मामले की भी जांच करवाने के लिए बादल सरकार पर दबाव बना रहे है।
Wednesday, May 25, 2011
पंजाब-बिहार में खुली घोटालों की पोल
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