राष्ट्रमंडल खेलों में अनुचित लाभ पाने वाली स्विस टाइमिंग कंपनी 2008 के पुणे यूथ गेम्स से कलमाड़ी के साथ थी। यूथ गेम्स में एकल टेंडर के जरिये स्विस टाइम को चुन लिया गया था। यह साझेदारी राष्ट्रमंडल खेलों तक आई। स्विस टाइम के प्रतिनिधि उस दौरान भी आयोजन समिति की तैयारी बैठकों में भी शामिल थे जब ठेका देने की प्रक्रिया शुरु नहीं हुई थी। स्विस टाइमिंग और टीम कलमाडी के रिश्तों की गहराई का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि यह कंपनी राष्ट्रमंडल खेलों की ठेका प्रक्रिया शुरू होने के पहले से आयोजन समिति के अधिकारियों के संपर्क में थी। कंपनी को टीएसआर का ठेका मार्च 2010 में मिला था, लेकिन उससे पहले स्टेडियमों में टाइम स्कोरिंग प्लानिंग को लेकर 25 जुलाई से पहली अगस्त 2009 के दौरान हुई आयोजन समिति की हर बैठक में स्विस टाइमिंग के भारत स्थित प्रतिनिधि क्लोडे फैव्रे मौजूद रहे। क्लोडे एक तरह से आयोजन समिति के तकनीकी सलाहकार का काम कर रहे थे। शुंगलू समिति ने अपनी रिपोर्ट में भी इस तथ्यों का जिक्र किया है। स्विस टाइमिंग को जब पुणे में हुए यूथ गेम्स में ठेका मिला था तब ठेके की निविदा में उसके सामने कोई कंपनी नहीं थी। यह अकेली कंपनी थी जिसने निविदा दाखिल की और अनुबंध पाया। शुंगलू समिति ने इस कंपनी और टीम कलमाडी की सांठगांठ की नई परतें भी खोली हैं। इस कंपनी ने अपनी निविदा को लेकर जो वित्तीय प्रस्ताव आयोजन समिति के समक्ष पेश किए उसके कई हिस्से शुंगलू समिति को मिले ही नहीं। आयोजन समिति इन पन्नों के गायब होने का कोई स्पष्ट जवाब भी नहीं दे सकी। उल्लेखनीय है कि हाल ही में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन के लिए सरकार से मिले धन में घोटाला करने के आरोप में कांग्रेसी सांसद सुरेश कलमाड़ी और उनके दो साथियों को गिरफ्तार किया था।
Sunday, May 1, 2011
कलमाड़ी ने ठेके से पहले ही कर ली थी साठगांठ
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment