56 हजार करोड़ रुपये! यह भारी भरकम धन टैक्स हैवेन देशों में भारत से हर साल जाने वाली राशि का ताजा और अधिकृत आंकड़ा है। अब यह बात प्रामाणिक और पुष्ट है कि बाहर जाने वाली विदेशी मुद्रा का करीब 20 फीसदी हिस्सा हर साल काली कमाई छिपाने वाले देशों यानी टैक्स हैवेन में जाता है। यह सनसनीखेज तथ्य रिजर्व बैंक के आंकड़ों से निकला है, जो आयकर विभाग पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की पड़ताल के जरिये सरकार तक पहुंचा है। इस रहस्योद्घाटन से टैक्स हैवेन का वह काला सच आधिकारिक रूप से सामने आ गया जिसका अंदेशा देश को पहले से था। इस पर कैग की मुहर लगने से यह भी जाहिर हो गया कि सब कुछ रिजर्व बैंक और आयकर विभाग की जानकारी में है। कैग की यह जांच काले धन के सबसे बड़े कारोबारी हसन अली का मामला खुलने के बाद की है यानी टैक्स हैवेन को पैसा लगातार जा रहा है। दैनिक जागरण के पास उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि रिजर्व बैंक के पास इसकी पूरी जानकारी है कि टैक्स हैवेन को कब-कब कितना पैसा भेजा गया? हसन अली मामले पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को पता नहीं कितनी सच्चाई बताई है, लेकिन सरकारी फाइलों में यह दर्ज है कि सिर्फ 2007-08 में 56 हजार 676 करोड़ रुपये दुनिया के उन देशों में गए, जिनकी पारदर्शिता संदिग्ध है। यह 2007-08 में देश से बाहर गई कुल विदेशी मुद्रा के लगभग 20 फीसदी के बराबर है। ऐसे देशों की संख्या 25 है और इनमें कई स्थानों पर भारत की काली कमाई जमा होने का शक है। इस आंकड़े के आधार पर यह माना जा रहा है कि हाल के पांच वषरें में ही करीब तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि इन संदिग्ध वित्तीय केंद्रों में गई है। यह विस्फोटक तथ्य कैग की जिस पड़ताल के बाद सामने आया है वह अनिवासी भारतीयों पर कराधान से संबंधित है। रिपोर्ट के अनुसार, संदिग्ध देशों को जाने वाले पैसे की न तो भेजते समय कोई जांच की गई और न ही बाद में। इस ऑडिट में कैग ने रिजर्व बैंक के 2007-09 तक के वे आंकड़े खंगाले, जो देश से बाहर विदेशी मुद्रा भेजने से संबंधित थे। कैग ने पाया कि काफी बड़ी राशि रॉयलटी फीस और तकनीकी सेवाओं के नाम पर उन छोटे-छोटे देशों को भेजी गई जहां से तकनीक या किसी तरह की सेवाओं का आयात संभव नहीं है।
Wednesday, May 25, 2011
सरकार की जानकारी में हो रही काले धन की निकासी
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment