ठ्ठ जागरण न्यूज नेटवर्क, भोपाल मध्य प्रदेश की लोकायुक्त पुलिस ने जेल मुख्यालय में पदस्थ
डीआइजी उमेश गांधी के यहां छापा मारकर करोड़ों रुपये की काली कमाई उजागर की है।
शनिवार सुबह साढ़े पांच बजे उमेश के भोपाल और सागर के ठिकानों पर एक साथ छापा मारा
गया। इसमें बड़ी मात्रा में अचल संपत्ति में निवेश के दस्तावेज बरामद हुए।
प्रारंभिक आकलन में डीआइजी के यहां से 25 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति होने के साक्ष्य मिले हैं। लोकायुक्त
पुलिस के मुताबिक, डीआइजी के जेल परिसर स्थित
सरकारी निवास वैष्णवी कुटीर में संपत्ति संबंधी सबसे ज्यादा दस्तावेज मिले हैं। घर
से बरामद संपत्ति में साढ़े चार लाख रुपये नकदी, दो किलो सोना, डेढ़ किलो चांदी, दो करोड़ 30 लाख 70 हजार की एफडी के दस्तावेज, 85 लाख बैंकों में जमा, टाटा सफारी, हुंडई एसेंट कार, दो दुपहिया वाहन मिले हैं।
साथ ही एक दर्जन से ज्यादा मकान, प्लाट, दुकान और कृषि भूमि का पता चला है। महंगे सजावटी सामानों में एंटीक
मूर्तियां और अष्टधातु की छह मूर्तियां भी मिली हैं। सीहोर जेल में प्रहरी के पद
पर पदस्थ डीआइजी के भाई अजय गांधी के सुभाष नगर स्थित घर में छापा मारा गया, जहां से 35 हजार रुपये नकद, सौ ग्राम सोने और 250 ग्राम चांदी के जेवर, अपेक्स बैंक टीटी नगर शाखा में लॉकर और पत्नी मनीषा के नाम ब्यूटी
पार्लर का पता लगा है। यह मकान अजय के भाई रामगोपाल की पत्नी चंद्रलेखा के नाम है।
सागर में रामगोपाल गांधी के एक और घर में छापा मारा गया, जहां से भूमि आदि संपत्ति की जानकारी हाथ लगी है। रामगोपाल की रवि
ट्रेडर्स के नाम से फर्म है जो जेल में कैदियों की रोजमर्रा की जरूरतों के सामान
की आपूर्ति करती है। जेल डीआइजी के खिलाफ काफी समय से आय से ज्यादा संपत्ति की
शिकायतें मिल रही थीं। लोकायुक्त पुलिस ने गोपनीय पड़ताल कराई तो शिकायतें सच पाई
गई। लोकायुक्त पुलिस के सूत्रों ने बताया कि तीनों जगह छापे में अचल संपत्ति के
काफी दस्तावेज हाथ लगे हैं। इसमें भोपाल में कॉम्प्लेक्स, अन्य जगहों पर पांच मकान और दो दुकान, 25 हजार वर्गफीट का फार्म हाउस, सागर बंडा में 4000 वर्गफीट
का भूखंड, बंडा में .42 हेक्टेयर भूमि, मकरोनिया में 1150 वर्गफीट का भूखंड, बंडा में एक एकड़ कृषि भूमि
और एक मकान, कटनी में पांच दुकान व एक
मकान, रायसेन में 1.98 एकड़ कृषि भूमि, मुरवारा में पांच हेक्टेयर
कृषि भूमि, इंदौर में दो मकान व दो
दुकान, जबलपुर में एक डुप्लेक्स।
इनका बाजार मूल्य 25 करोड़ रुपये से ज्यादा का
आंका गया है। उमेश गांधी जेल सेवा में 1987 में आए थे। 2010 में डीआइजी जेल बने। यहां
फिलहाल ये निरीक्षण, सांख्यिकी, पेंशन, लेखापाल और भवन शाखा का काम
देख रहे हैं। गांधी पहले भी विवादों में आ चुके हैं, जब जेल में भर्ती और राशन की आपूर्ति के मामले उठे थे।
Dainik Jagran National Edition 4-11-2012 (Hkz”Vkpkj)Page -1

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