Wednesday, June 29, 2011

बीएस लाली पर मनी लांड्रिंग का मामला दर्ज

प्रसार भारती के पूर्व सीईओ बी.एस. लाली पर अब मनी लांड्रिंग का फंदा भी कस गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके खिलाफ मनी लांड्रिंग रोकने के कानून के तहत केस दर्ज कर लिया है। लाली पर ब्रिटेन की कंपनी एसआइएस को राष्ट्रमंडल खेलों के प्रसारण का ठेका देने में 135 करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप है। इस मामले में सीबीआइ पहले से ही उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत एफआइआर दर्ज कर कार्रवाई कर रही है। सीबीआइ जहां इस घोटाले की आपराधिक साजिश की जांच कर रही है, वहीं ईडी की जिम्मेदारी घोटाले से की गई काली कमाई का पता लगाकर उसे जब्त करने की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि घोटाले में शामिल लाली के साथ ही एसआइएस और जूम कम्यूनिकेशन के अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। गौरतलब है कि राष्ट्रमंडल खेल घोटालों की जांच के लिए प्रधानमंत्री द्वारा गठित शुंगलू समिति ने इस घोटाले के लिए सीधे तौर पर लाली और दूरदर्शन की महानिदेशक अरुणा शर्मा को जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन सूचना और प्रसारण मंत्रालय की अनुमति नहीं मिलने से अरुणा शर्मा के खिलाफ कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई। बीती एक फरवरी को शुंगलू समिति ने पूरे घोटाले को लाली, अरुणा शर्मा और एसआइएस/जूम कम्यूनिकेशन की साजिश करार दिया था। सारे दस्तावेजी सुबूतों के साथ शुंगलू समिति ने बताया था कि किस तहत लाली और शर्मा ने प्रसार भारती की स्वायत्तता का दुरुपयोग करते हुए 100 करोड़ रुपये से भी कम के काम को एसआइएस को 246 करोड़ में दे दिया। यहीं नहीं, जिस दिन दूरदर्शन ने एसआइएस को खेलों के प्रसारण के लिए 246 करोड़ रुपये का ठेका दिया, उसी दिन एसआइएस ने यह काम जूम कम्यूनिकेशन को 170 करोड़ में दे दिया। मजेदार बात यह है कि इस काम पर जूम कम्यूनिकेशन को मात्र 111 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। इस तरह सरकारी खजाने को 135 करोड़ की चपत लगी।


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