लोकपाल विधेयक के प्रारूप पर टीम अन्ना के निशाने पर आई मनमोहन सरकार ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए एक नायाब तरीका ढूंढ लिया है। इसके तहत सरकार भ्रष्टाचार रोकने वाले विभागों के बाबुओं को बाकायदा इनाम देने की तैयारी में है। इनाम की राशि इन बाबुओं के मूल वेतन के पांच फीसदी से 40 फीसदी तक होगी। सीधे प्रधानमंत्री के मातहत आने वाले कैबिनेट सचिवालय के प्रदर्शन प्रबंधन विभाग ने भ्रष्टाचार रोकने के इस नायाब तरीके का प्रस्ताव किया है। दरअसल सरकार ने अपने विभागों का प्रदर्शन सुधारने और उन्हें ज्यादा उत्तरदायी बनाने के लिए प्रदर्शन प्रबंधन (परफारमेंस मैनेजमेंट) नाम का नया विभाग बनाया था। इस विभाग ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों को इनाम देने की योजना बनाई है। इसके तहत पूर्व निर्धारित सालाना लक्ष्य के 70 फीसदी से कम प्रदर्शन करने वाले विभागों के कर्मचारियों को कोई इनाम नहीं मिलेगा। वहीं 100 फीसदी लक्ष्य प्राप्त करने वाले विभागों के कर्मचारियों को पहले साल में मूल वेतन का 20 फीसदी, दूसरे साल में 30 फीसदी और तीसरे साल में 40 फीसदी तक ईनाम दिया जाएगा। इसी तरह 80 से 90 फीसदी प्रदर्शन करने वाले विभागों के लिए भी अलग-अलग इनाम रखे गए हैं, लेकिन ईनाम की इस रकम को पाने के लिए संबंधित विभागों को पहले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उपाय करने होंगे। प्रत्येक विभाग को बाकायदा प्रबंधन प्रदर्शन विभाग को बताना होगा कि उसने अपने यहां भ्रष्टाचार रोकने के लिए क्या-क्या उपाय किए हैं और वे कितने सफल रहे हैं, लेकिन प्रदर्शन प्रबंधन विभाग उनके दावों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर लेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा किभ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों को मिलने वाली भ्रष्टाचार की शिकायतों को भी किसी भी विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के मापदंड का आधार बनाया जाएगा। पिछले दिनों प्रदर्शन प्रबंधन पर एक प्रस्तुतिकरण के दौरान प्रदर्शन प्रबंधन सचिव डॉ. प्रजापति त्रिवेदी ने साफ कर दिया कि भ्रष्टाचार पर रोक लगाए बिना कोई भी विभाग केवल अपने प्रदर्शन के आधार पर ईनाम पाने का हकदार नहीं हो सकता है। साफ है भ्रष्टाचार के खिलाफ देश में बने माहौल को देखते हुए सरकार अपने विभागों को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए नए और नायाब तरीके अपनाने पर मजबूर हो रही है।

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