संचार मंत्री रहते हुए एयरसेल को बेचने के लिए मजबूर करने के मामले में सीबीआइ अब कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन के खिलाफ शिकंजा कसने की तैयारी में है। जांच एजेंसी के सामने मारन की भूमिका के बारे में पूर्व संचार सचिव नृपेंद्र मिश्रा के खुलासे से डीएमके नेता की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीबीआइ ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में साफ कर दिया कि इस मामले में मारन की भूमिका की जांच की जा रही है और जल्द ही उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज की जा सकती है। एक अन्य घटनाक्रम में प्रधानमंत्री आवास पर सोनिया गांधी, प्रणव मुखर्जी, चिदंबरम, एके एंटनी और अहमद पटेल की मौजूदगी में मारन के मामले पर भी चर्चा हुई। माना जा रहा है कि संसद के अगले सत्र में मारन को लेकर विपक्ष के हमले से बचने के लिए सरकार ने मंत्रिमंडल से उनकी विदाई का मन बना लिया है, लेकिन सरकार कोई फैसला करने के पहले करुणानिधि से भी बात करेगी। मारन मामले में दूरी बनाते हुए कांग्रेस ने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, वह सीबीआइ के प्रवक्ता नहीं हैं। अगर सीबीआइ ने उच्चतम न्यायालय को कोई रिपोर्ट सौंपी है तो इसकी जानकारी सीबीआई को होगी या उच्चतम न्यायालय को होगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआइ ने 2001 से 2007 के बीच स्पेक्ट्रम आवंटन में हुई गड़बडि़यों की प्रारंभिक जांच शुरू की थी। इसके चलते 2004 से 2007 के बीच संचार मंत्री दयानिधि मारन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई। पिछले महीने एयरसेल के पुराने मालिक एस. शिवाशंकरन ने सीबीआइ को दिए बयान में आरोप लगाया था कि मारन ने उन्हें कंपनी बेचने के लिए मजबूर किया था। मारन के समय दूरसंचार विभाग के तीन बड़े अधिकारियों ने सीबीआइ की पूछताछ में शिवाशंकरन के आरोपों की पुष्टि की। इनमें तत्कालीन संचार सचिव नृपेंद्र मिश्रा, वरिष्ठ उप महानिदेशक पीके मित्तल और संयुक्त सलाहकार (वायरलेस) आरजेएस कुशवाहा शामिल हैं। इन तीनों अधिकारियों ने जांच एजेंसी को बताया कि किस तरह मारन ने लंबे समय तक एयरसेल को स्पेक्ट्रम का लाइसेंस नहीं मिलने दिया और फिर उसके बिकते ही कैसे उसे लाइसेंस दे दिए गए। सीबीआइ ने इन तीनों अधिकारियों के बयान के बारे में सुप्रीम कोर्ट को बता दिया है। सीबीआइ अधिकारी ने कहा कि एयरसेल मामले में मारन परिवार की कंपनी सन डायरेक्ट के मार्फत रिश्वत लेने की जांच की जा रही है। एयरसेल को खरीदने वाले श्रीलंकाई मूल के मलेशियाई उद्योगपति टी आनंद कृष्णन की दूसरी कंपनी एस्ट्रो ने सन डायरेक्ट का 20 फीसदी शेयर 69.57 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से 599 करोड़ रुपये में खरीदा था। सन डायरेक्ट में यह निवेश एयरसेल को लाइसेंस मिलने के तत्काल बाद किया गया। आरोप है कि एस्ट्रो ने सन डायरेक्ट के शेयर की कीमत बाजार मूल्य से काफी ज्यादा लगाई औैर इससे मारन परिवार को करोड़ों का अतिरिक्त लाभ हुआ। इसकी भी जांच की जा रही है|
Thursday, July 7, 2011
2जी में दयानिधि भी दागदार
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