, नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के बेल्लारी जिले में लौह अयस्क के खनन पर अगले आदेश तक पूरी तरह रोक लगा दी है। अवैध और अनियंत्रित खनन से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखते हुए कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने देश में स्टील उद्योग के लिए लौह अयस्क की जरूरत पर केंद्र से एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। मुख्य न्यायाधीश एसएच कपाडि़या, न्यायमूर्ति आफताब आलम व न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की पीठ ने कर्नाटक के वन क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन के मामले में सुनवाई के दौरान ये आदेश जारी किए। कोर्ट ने बेल्लारी जिले में 10,868 हेक्टेयर में चल रहा खनन अगले आदेश तक निलंबित रखने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा है कि इस बीच केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय एक सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल कर बताए कि देश में स्टील इंडस्ट्री के लिए कुल कितने लौह अयस्क की जरूरत होती है। कितना लौह अयस्क घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए चाहिए होता है और कितना निर्यात किया जाता है। देश में कुल लौह अयस्क की जरूरत भी बताने को सरकार से कहा गया है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, यह जानकारी इस्पात, खनन व वाणिज्य मंत्रालय से एकत्र करेगा। पीठ ने पर्यावरण मंत्रालय को इस बाबत तत्काल संबंधित मंत्रालय के सचिवों के साथ बैठक कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं कोर्ट ने वन मामलों की केंद्रीय अधिकारिता समिति (सीईसी) को कर्नाटक के दो जिलों तुमकूर और चित्रदुर्ग के बारे में पर्यावरण प्रभाव आकलन कर तीन सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पर्यावरण की कीमत पर खनन की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने राज्य सरकार से भी कहा है कि वह खनन से पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई की योजना बताये। राज्य सरकार को कुल खनन और उससे पहंुचे नुकसान का हिसाब रखना होगा और पक्षकारों को नुकसान की भरपाई करनी होगी, तभी आगे खनन की अनुमति दी जा सकती है। जब खनन कंपनियों और अन्य पक्षकारों ने खनन पर पूरी तरह रोक लगाने का विरोध किया और कोर्ट को वर्ष 2006 के आदेश की याद दिलाई जिसमें सशर्त खनन जारी रखने की अनुमति दी गई थी, तो पीठ ने कहा कि पुराने आदेशों का हवाला मत दो। पीठ ने कहा कि कोर्ट कई बार संतुलन बनाने की कोशिश कर चुका है, लेकिन इसका उल्लंघन होता रहा। इसलिए मजबूर होकर ही उन्हें हरियाणा के बारे में भी आदेश देने पड़े थे। पीठ ने कहा कि वे पहले यह देखेंगे कि बेल्लारी में और खनन की क्षमता बची भी है कि नहीं। उधर सीईसी ने बेल्लारी में खनन संबंधी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया और कहा कि पूरा तंत्र ही फेल है।
Saturday, July 30, 2011
बेल्लारी में खनन पर सुप्रीम कोर्ट की
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