Monday, July 18, 2011

नोट के बदले वोट में संजीव गिरफ्तार

वर्ष 2008 के बहुचर्चित नोट के बदले वोट मामले में सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद दिल्ली पुलिस रविवार को हरकत में आई। अपराध शाखा ने मामले में पूर्व सपा नेता अमर सिंह के करीबी संजीव सक्सेना को पूछताछ के लिए बुलाया और फिर गिरफ्तार कर लिया। तीन साल बाद मामले में यह पहली गिरफ्तारी है। मामले में अन्य नेताओं की भूमिका के बारे में सक्सेना से पूछताछ की जा रही है। सोमवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। हो सकता है पुलिस सक्सेना को रिमांड पर ले। अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त अशोक चांद ने बताया कि सक्सेना को भ्रष्ट्राचार निरोधक अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है। अपराध शाखा इस मामले में सबूत जुटाने में लग गई है। पुलिस के मुताबिक मामले में सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी जाएगी। ज्ञात रहे तीन साल पुराने नोट के बदले वोट मामले में अब तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं किए जाने पर शुक्रवार को शीर्ष न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को जमकर फटकार लगाई थी। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा था कि उसने अब तक क्या किया है। कोर्ट ने दो हफ्ते के अंदर स्टेटस रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद पुलिस हरकत में आई। 22 जुलाई 2008 को भाजपा सांसद अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते तथा महावीर भगोरा ने संसद में एक करोड़ रुपये लहराते हुए लोकसभा अध्यक्ष को बताया था कि उन्हें यह रकम अविश्वास प्रस्ताव के दौरान यूपीए सरकार के पक्ष में वोट डालने के लिए दी गई है। भारत अमेरिका के बीच हुए परमाणु करार के विरोध में वामपंथी दलों द्वारा सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद मनमोहन सिंह सरकार को अविश्वास प्रस्ताव शेष कृष्ठ 2 कालम 1 कर

नोट के बदले वोट में संजीव गिरफ्तार का सामना करना पड़ा था। मामला यूपीए सरकार से जुड़ा होने व संजीव सक्सेना की अमर सिंह से नजदीकी होने के कारण दिल्ली पुलिस उस पर हाथ डालना नहीं चाह रही थी, लेकिन शीर्ष न्यायालय के कड़े रुख के बाद पुलिस के पास कोई विकल्प नहीं बचा था। इसके बाद रविवार को अपराध शाखा ने उन्हें पूछताछ के लिए चाणक्यपुरी स्थित दफ्तर में बुलाया, जहां उसे गिरफ्तार कर लिया गया। संजीव सक्सेना पूर्वी जिले के आइपी एक्सटेंशन इलाके में परिवार समेत रहते हैं। सूत्रों के अनुसार नोट के बदले वोट मामले में पूर्व सपा नेता अमर सिंह, सपा सांसद रेवतीरमण सिंह और सुहेल हिंदुस्तानी आदि की भूमिका की भी जांच की जा रही है। संजीव सक्सेना की गिरफ्तारी का मतलब पुलिस को सौंपा, लेकिन पुलिस ने दो साल तक जांच में कुछ खास नहीं किया। इस बीच, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त जेएम लिंगदोह ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर इस मामले में कार्रवाई की गुहार की। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच में दिल्ली पुलिस की सुस्ती को लेकर बीते शुक्रवार को उसे कड़ी फटकार लगाई। पुलिस हरकत में आयी और रविवार को संजीव सक्सेना गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ शुरू कर दी।

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