पटना भूमि आवंटन विवाद से घिरी नीतीश सरकार अब 24 अरब की नई वित्तीय गड़बडि़यों में फंस गई है। भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में राज्य सरकार पर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वित्तीय वर्ष में बेवजह ख़र्च,गलत भुगतान, कर लगाने -वसूलने में हुई गड़बड़ी के कारण सरकार को लगभग 24 अरब की राजस्व हानि हुई है। वहीं, पथ निर्माण विभाग ने कैग की आपत्तियों पर अपने उन्नीस डिवीजनों के कार्यपालक अभियंताओं को दो दिनों के भीतर इस बारे में रिपोर्ट देने को कहा है। बिहार के प्रधान महालेखाकार प्रेमन दिनाराज ने 2009-10 की आडिट रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि सिर्फ 2092 मामलों की जांच में 2399.68 करोड़ के नुकसान का पता चला है। रिपोर्ट के मुताबिक, वाणिज्य कर विभाग के टैक्स आकलन में त्रुटि से 610 करोड़, शराब की दुकानों की बंदोबस्ती में गड़बड़ी से 134 करोड़ व इसी तरह की अन्य अनियमितताओं से अरबों का घाटा हुआ है। रिपोर्ट में राच्य के स्कूलों और विभिन्न जि़लों में छात्र-छात्राओं के लिए खुले कंप्यूटर केंद्र की दुर्दशा पर आंकड़ों के साथ गंभीर टिप्पणियां की हैं। इसमें कहा गया है कि जिन 241 माध्यमिक स्कूलों के नमूनों की जांच हुई,उनमें से दो तिहाई स्कूलों में शौचालय, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और पढ़ने के कमरे तक नहीं थे। दस जिलों में खुले 549 कंप्यूटर केंद्रों के बारे में बताया गया है कि कुछ कंप्यूटर तो चोर ले गए, कुछ अधिकारी उठा कर ले गए और जो बच गए, वो खराब हालत में पड़े हैं। जांच के क्रम में यह बात सामने आयी है कि वित्तीय गड़बडि़यों के कुछ मामले 41 साल पुराने हैं जिनमें अभी तक एडवांस समायोजित किए जाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पायी है। अप्रैल 2010 से मई 2011 के बीच के मामलों के नमूना जांच क्रम में यह तथ्य सामने आया है कि 1.90 करोड़ रुपये का अग्रिम समायोजित नहीं हो पाया है। जिन अफसरों से यह मामला संबद्ध है उनमें 65 विभिन्न डिविजनों में स्थानांतरित हो गये, 14 रिटायर हो गये और पांच की मृत्यु हो गयी। रिटायर हो चुके और जिन अफसरों की मृत्यु हो चुकी है उनसे 23.34 लाख रुपये की वसूली होनी है। इसी प्रकार पथ निर्माण विभाग के तमाम डिवीजनों का भी लेनदेन दुरुस्त नहीं है। जिन डिवीजनों का मामला फंसा है उसमें वैशाली पथ प्रमंडल, हाजीपुर, पथ प्रमंडल दरभंगा, पथ प्रमंडल मुंगेर, नयी राजधानी पथ प्रमंडल, पथ प्रमंडल, बक्सर, पथ प्रमंडल बिहारशरीफ, पथ प्रमंडल सुपौल, पथ प्रमंडल संख्या-1, जहानाबाद, राज्य उच्च पथ प्रमंडल नवादा, पथ प्रमंडल बेगूसराय, पटना पश्चिम पथ प्रमंडल, पथ प्रमंडल, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गया, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल (यांत्रिक), मुजफ्फरपुर, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, सीतामढ़ी और राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी शामिल है। महालेखाकार आइडीएस धारीवाल ने बताया कि राज्य के सरकारी खज़ाने से विभिन्न मदों में ख़र्च के लिए एसी बिल के ज़रिए निकाले गए 15 हज़ार करोड़ के व्यय का अधिकृत ब्यौरा डीसी बिल के रूप में अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। 11 हज़ार करोड़ ख़र्च का जो डीसी बिल सौंपा गया है, उनमें से मात्र 64 करोड़ के ही वाउचर सही और समायोजन किए जाने लायक हैं। उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2002-09 के एसी-डीसी बिल वाले 11 हज़ार करोड़ के कथित घोटाले को लेकर नीतीश सरकार के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में मामला दर्ज कराया गया था।

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