Monday, July 25, 2011

कर्नाटक में खनन घोटाले की रिपोर्ट राज्यपाल को नहीं सौंपेंगे हेगड़े

कर्नाटक के लोकायुक्त न्यायमूर्ति एन संतोष हेगड़े राज्य में हुए खनन घोटाले की रिपोर्ट राज्यपाल हंसराज भारद्वाज को नहीं सौंपेंगे। परंपरा को तोड़ते हुए राज्यपाल को रिपोर्ट सौंपकर हेगड़े मुख्यमंत्री बीएस येद्दयुरप्पा और गवर्नर हंसराज भारद्वाज के बीच चल रहे शीतयुद्ध में नहीं फंसना चाहते। उधर, हेगड़े ने शनिवार को एक इंटरव्यू में कहा कि इस रिपोर्ट पर येद्दयुरप्पा सरकार कार्रवाई करेगी, इस पर उन्हें संदेह है, उन्हें सिर्फ सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद है। लोकायुक्त के सूत्रों ने तर्क दिया है कि इस मामले की जांच का जिम्मा उन्हें राज्यपाल ने नहीं बल्कि सरकार ने सौंपा था। इसलिए रिपोर्ट राज्य सरकार को ही सौंपी जाएगी। मुख्यमंत्री पर फिर हमलावर होने का संकेत देते हुए भारद्वाज ने शुक्रवार को कहा था कि लोकायुक्त अगर उन्हें रिपोर्ट भेजते हैं तो वह लोकायुक्त कानून की धारा 12 और 13 के तहत आवश्यक कार्रवाई करेंगे। लोकायुक्त के सूत्रों के मुताबिक चूंकि जांच का जिम्मा सरकार ने सौंपा था लिहाजा लोकायुक्त राज्यपाल को रिपोर्ट सौंपने के लिए बाध्य नहीं हैं। हालांकि राज्यपाल रिपोर्ट की एक प्रति मंगा सकते हैं और राज्य सरकार को सलाहकारी सिफारिशें भी दे सकते हैं। हेगड़े ने यह भी माना कि यह जरूरी नहीं है कि राज्य सरकार इस रिपोर्ट को स्वीकार करे जिसमें सीधे मुख्यमंत्री बीएस येद्दयुरप्पा पर सवाल उठाए गए हैं। लीक हुई रिपोर्ट में कर्नाटक सरकार के चार मंत्रियों को अवैध खनन मामले में दोषी ठहराया गया है, इनमें तीन खनिज संपदा से भरपूर बेल्लारी जिले के रेड्डी बंधु हैं। लोकायुक्त ने रिपोर्ट में कहा है कि इन ताकतवर मंत्रियों के संरक्षण में अवैध खनन से मार्च 2009 से अब तक 14 महीनों में ही राज्य को करीब 1800 करोड़ रुपये का चूना लगा है। हेगड़े ने कहा कि लोकायुक्त भी उन लोगों के खिलाफ मुकदमा चला सकता है, जिन्हें आरोपी बनाया गया है। दो अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हेगड़े ने लोकायुक्त द्वारा मुकदमा चलाए जाने की बात अपने उत्तराधिकारी पर डाल दी। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हेगड़े ने दावा किया कि बेल्लारी में अवैध खनन के मामले में उनके पास ठोस सबूत हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त की गई केंद्रीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति भी इस रिपोर्ट का सहारा ले सकती है।

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