Thursday, July 28, 2011

येद्दयुरप्पा के परिजनों ने ली 30 करोड़ की रिश्वत

कर्नाटक सरकार का काला चिट्ठा खोलते हुए लोकायुक्त एन संतोष हेगड़े ने बुधवार को अवैध खनन मामले में बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट पेश की। मीडिया में लीक हुई खबरों पर मुहर लगाते हुए हेगड़े ने बताया कि कैसे मुख्यमंत्री बीएस येद्दयुरप्पा के परिवार के प्रेरणा ट्रस्ट ने खनन कंपनियों से 30 करोड़ की रिश्वत ली। एक खनन कंपनी ने ट्रस्ट को उधार लेकर दस करोड़ का दान दिया। ट्रस्ट ने खनन कंपनी को एक एकड़ जमीन करीब 20 करोड़ में बेची जबकि उसकी अनुमानित कीमत 1.4 करोड़ थी। हेगड़े ने सीएम के खिलाफ कार्रवाई के लिए राज्यपाल से सिफारिश की है। करीब 26,000 पन्नों की रिपोर्ट के मुताबिक अवैध खनन की काली कमाई में येद्दयुरप्पा के अलावा राज्य सरकार के चार मंत्रियों व 600 के करीब अधिकारियों की संलिप्तता थी। 2006-2010 के बीच 16,085 करोड़ के घोटाले का दावा कर रही यह रिपोर्ट दर्शाती है कि मंत्रियों, अफसरों और खनन उद्यमियों के मजबूत नेटवर्क ने किस कदर खजाने को लूटा। हेगड़े ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, खनन मामले में मुख्यमंत्री येद्दयुरप्पा, पूर्व मुख्यमंत्री व जेडीएस नेता एच डी कुमारस्वामी, रेड्डी बंधु (राज्य सरकार में मंत्री और खनन उद्यमी), उनके कुछ सहयोगियों , मंत्री एच श्रीरामूलू, कांग्रेस सांसद अनिल लाड की पत्नी के नाम हैं। इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक व अन्य कानूनों के तहत अभियोजन की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में मई 2008 से सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को खनन कार्य में अनियमितताओं और गैरकानूनी गतिविधियों को रोक नहीं पाने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। हेगड़े की मुख्य रिपोर्ट 943 पन्नों की है। कुमारस्वामी के संदर्भ में जांच में उनकी ओर से खनन के दो पट्टे देने में कदाचार की बात सामने आई है। हेगड़े ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत अपराध होने के नतीजे पर पहुंचने के साथ ही उन्होंने राज्यपाल से मुख्यमंत्री येद्दयुरप्पा के खिलाफ आगे कदम उठाने की सिफारिश की है क्योंकि मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए समक्ष प्राधिकार प्रदेश के राज्यपाल हैं। अनुलग्नकों के साथ रिपोर्ट की एक प्रति आगे की कार्रवाई के लिए राज्यपाल को भेजी गई है। रेड्डी बंधु के बारे में हेगड़े ने कहा कि कर्नाटक में खनन नहीं करने का उनका दावा झूठा है। इस आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज हैं। लोकायुक्त ने अनेक अनियमितताओं के मद्देनजर सरकार से खनन कंपनियों का लाइसेंस निरस्त करने और नुकसान को चोरी हुआ लौह अयस्क मानते हुए संबंधित लोगों से बाजार मूल्य पर इसका धन वसूलने की सिफारिश की।


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