काले धन के मसले पर चौतरफा आलोचनाएं झेल रही केंद्र सरकार गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआइओ) को और अधिकारों से लैस करने की तैयारी कर रही है। कंपनी मामलों का मंत्रालय अपनी इस जांच इकाई को और अधिक कानूनी और प्रशासनिक अधिकार देने पर विचार कर रहा है। इससे कंपनियों द्वारा विदेशों में जमा धन का पता लगाने में आसानी होगी। कंपनी मामलों के मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि इस इकाई को स्थिरता देने के लिए एक स्थायी कैडर पर भी विचार चल रहा है। इससे इस तरह की एजेंसी में अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर लेने से बचा जा सकेगा। इससे निरंतरता बनी रहेगी और लचीलापन भी रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि धन को इधर-उधर किया जाता है, तो यह कंपनी अधिनियम का उल्लंघन होगा। पर जब यह धन विदेश भेज दिया जाता है, तो यह हवाला का मामला बन जाता है, तब यह प्रवर्तन निदेशालय के दायरे में आ जाता है। मोइली ने कहा कि यदि किसी तरह की कोई खामी होगी, तो तंत्र को और मजबूत किया जाएगा ताकि दोषी हमारे हाथों से बच न पाएं। इस कार्यालय को जो भी कानूनी या अन्य अधिकार दिए जाने की जरूरत होगी, दिए जाएंगे। गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय को अधिक अधिकार दिए जाने का प्रस्ताव बहुत हद तक वी वेपा कामेशम समिति की सिफारिशों के आधार पर है। हालांकि समिति ने एसएफआइओ को विदेशों में जमा धन की जांच के लिए अधिकार दिए जाने की सिफारिश नहीं की है। आठ सदस्यीय समिति का सुझाव है कि एसएफआइओ को वित्तीय घोटाले में शामिल इकाइयों की जांच और मामला चलाने का विशिष्ट अधिकार होना चाहिए। साथ ही समिति ने एसएफआइओ को आयकर विभाग, सीमा शुल्क विभाग और प्रवर्तन निदेशालय की तरह छापेमारी, जब्ती का अधिकार दिए जाने की भी सिफारिश की है। इसने यह भी सुझाव दिया है कि एसएफआइओ को स्रोत आधारित सूचना के आधार पर खुद संज्ञान लेते हुए जांच का अधिकार भी मिलना चाहिए। मोइली ने कहा कि इस समय वित्त मंत्रालय दोहरे कराधान बचाव संधि को देख रहा है। जब यहां कोई घोटाला होता है, तो घोटाले में शामिल कंपनी या व्यक्ति ने देश के बाहर भी काफी धन जमा कराया होता है। कॉरपोरेट धोखाधड़ी की जांच करने वाली एसएफआइओ काफी समय से विदेशों में भी जांच का अधिकार चाह रही है। अधिकारों की कमी की वजह से ही हजारों करोड़ रुपये के सत्यम कंप्यूटर घोटाले में जांच प्रभावित हुई है।
Tuesday, July 26, 2011
धोखाधड़ी जांच कार्यालय को मिलेंगे और अधिकार
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