सुप्रीमकोर्ट ने काले धन की जांच तेज करने के लिए विशेष जांच दल (एसआइटी) गठित करने का निर्देश दिया था, लेकिन हो ठीक इसका उल्टा रहा है। अब तक एसआइटी का गठन तो हुआ ही नहीं है, वित्त मंत्रालय की तरफ से गठित समितियां भी काम नहीं कर पा रही हैं। सुप्रीमकोर्ट में सरकार की तरफ से अपील दायर होने से मामला उलझ गया है। अब ये समितियां निर्धारित अवधि के भीतर रिपोर्ट भी नहीं दे सकेंगी। सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद राजस्व सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति पूरी तरह से निष्कि्रय हो गई है। आइबी, ईडी, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, वित्तीय जांच ब्यूरो, आरबीआइ सहित कई जांच एजेंसियों वाली इस समिति ने 26 अप्रैल, 2011 को गठन के तुरंत बाद काम शुरू कर दिया था। काफी सूचनाओं का आदान-प्रदान भी हुआ, लेकिन सुप्रीमकोर्ट के निर्देश के बाद सब कुछ ठप है। अब केंद्र की तरफ से इस निर्देश पर फिर से विचार की अपील की गई है। जब तक सुप्रीमकोर्ट इस बारे में फैसला नहीं सुनाता, इसका कामकाज बाधित ही रहेगा। यही हाल सीबीडीटी चेयरमैन की अध्यक्षता में गठित दूसरी समिति का भी है। सुप्रीमकोर्ट के निर्देश में इस समिति का भी जिक्र है। एसआइटी के गठन के साथ सुप्रीम कोर्ट ने जो जिम्मेदारियां उसे सौंपी हैं उनमें से कई सीबीडीटी अध्यक्ष वाली समिति को सरकार ने पहले ही दे रखीं थीं। मसलन, काले धन पर रोक लगाने के लिए मौजूदा किन कानूनों में संशोधन करने की जरूरत है, इसके बारे में सीबीडीटी अध्यक्ष वाली समिति को भी रिपोर्ट देनी थी। अब एसआइटी की निगरानी वाली समिति को यह काम करने को कहा गया है। सीबीडीटी अध्यक्ष वाली समिति ने गठन के कुछ दिनों बाद काम करना शुरू कर दिया था। सीबीडीटी के सूत्रों के मुताबिक, समिति ने अपनी पहली बैठक में आम आदमी से काले धन पर प्रतिक्रिया मांगी थी। तीन हफ्ते के भीतर चार हजार सुझाव व प्रतिक्रियाएं समिति को प्राप्त हुई हैं। समिति अपनी बैठकों का सिलसिला शुरू ही करने वाली थी कि सुप्रीमकोर्ट का फैसला आ गया। लिहाजा यह समिति भी अब स्थिति के साफ होने का इंतजार कर रही है। समिति को छह महीने के भीतर ही अपनी रिपोर्ट देनी थी। जिसमें से लगभग डेढ़ महीने यूं ही जाया हो गये हैं।
Monday, July 18, 2011
कालेधन की जांच ठप
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