Monday, July 18, 2011

10साल, 15 हजार करोड़ का भ्रष्टाचार एक व्यक्ति को 2009 में देनी पड़ी 2 हजार से ज्यादा की रिश्वत खुलासा :

पिछले दशक में 1555 हजार करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ और इसका एक बड़ा हिस्सा अवैध तरीके से भारत के बाहर भेज दिया गया। हाल में आए एक अध्ययन रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। मनी लांड्रिंग के संदर्भ में भारत में भ्रष्टाचार का आकार सुनिश्चित करने के बारे में आई अपने ढंग की इस पहली रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यक्ति को वर्ष 2009 में दो हजार से अधिक रुपये रिश्वत के तौर पर देने पड़े। दस वर्ष पहले एक नागरिक को जितना देना पड़ता था उसकी तुलना में यह रकम 260 फीसदी है। इस अवधि में रिश्वतखोरी 836 रुपये से बढ़कर 2218 रुपये प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष हो गई। पिछले दशक में भारत से मनी लांड्रिंग के जरिए कम से कम 1886 हजार करोड़ रुपये बाहर के मुल्कों में भेजे गए। यदि मनी लांड्रिंग को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) आधारित मॉडल में बदलकर भारत में भ्रष्टाचार की रकम निर्धारित की जाए तो यह रकम 1555 हजार करोड़ रुपये है। यह अध्ययन पुणे की इंडियाफोरेंसिक नामक कंपनी का है। यह जालसाजी, सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन और फोरेंसिक अकाउंटिंग रिसर्च की अग्रणी कंपनी है। यह कंपनी लंबे समय से सीबीआइ जैसी जांच एजेंसियों ल्ल शेष कृष्ठ 15 कर

10साल, 15 हजार करोड़ का भ्रष्टाचार को कई बड़े मामलों की जांच में मदद करती रही है। यह निष्कर्ष मनी लांड्रिंग के आकलन के लिए प्राप्त बहुत थोड़े से आंकड़ों के आधार पर निकाला गया है। इसे निकालने के लिए संपत्ति बरामदगी, अपराध आधारित और जीडीपी आधारित कुल तीन मॉडल अपनाए गए। इस कंपनी के संस्थापक सदस्य और जालसाजी विरोधी एवं मनी लांड्रिंग विशेषज्ञ मयूर जोशी ने कहा, तीन मॉडलों से मनी लांड्रिंग की पूरी राशि का पता लगा। यह राशि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों पर आधारित है। मयूर ने हजारों करोड़ रुपये के सत्यम घोटाले में सीबीआइ की सहायता की थी। संपत्ति बरामदगी मॉडल के अनुसार अपराध प्रक्रिया के तहत कुल बरामदगी 190 करोड़ रुपये की हुई।

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