Monday, July 18, 2011

केंद्र के प्रस्तावित संशोधन बिल का होगा विरोध

जमीन अधिग्रहण प्रतिरोध आंदोलन समिति ने केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे संशोधित अधिग्रहण बिल का विरोध किया है। किसानों का कहना है कि प्रस्तावित बिल से किसानों का भला होने वाला नहीं है। केंद्र सरकार को यदि हकीकत में किसानों के हितों की चिंता है तो उसे ऐसा बिल लाना चाहिए, जिसमें किसान को अपनी जमीन का भाव तय करने व बेचने का अधिकार मिले। निर्णय लिया गया कि 3 अगस्त को संसद के घेराव में यहां के सभी संगठन शामिल होंगे। जमीन अधिग्रहण प्रतिरोध आंदोलन समीति, भारतीय किसान यूनियन, किसान सभा, सीपीआई व राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने परी चौक स्थित अखिल भारतीय गुर्जर संस्कृति शोध संस्थान में रविवार को पंचायत की। सभी ने एक राय से कहा कि केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिल में कई खामियां है, इन्हें दूर नहीं किया गया तो किसानों को कोई फायदा नहीं होगा। संशोधित कानून ऐसा बनना चाहिए, जिसमें गांव के 90 प्रतिशत किसानों की सहमति के बिना जमीन न ली जाए। 1884 का कानून रद होना चाहिए। इस मौके पर सूरजमल, सरदाराम वर्मा, रूपेश वर्मा, डॉ. जितेंद्र नागर, अजयपाल शर्मा, श्यौराज सिंह रावल, बिहारी सिंह बागी, भाजपा नेता बिजेंद्र सिंह भाटी, सपा नेता राजकुमार भाटी, नत्थीराम शर्मा, उदयवीर मलिक, मुमताज परवीन, ओमपाल भाटी, विजय, रविदत्त शर्मा, टीकम सिंह, जगदीश लोहिया, बलजीत, विनोद, जयकरण भाटी, हरेंद्र खारी, वीर सिंह नागर, चरणजीत नागर, खड़क सिंह, ऋषिपाल, नरेंद्र भाटी आदि मौजूद रहे

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