Saturday, July 16, 2011

नोएडा प्लॉट घोटाले में सीबीआइ कोर्ट की कार्यवाही सही : हाईकोर्ट

इलाहाबाद, जागरण ब्यूरो : नोएडा में 2004 में रिहायशी प्लाट आवंटन घोटाले के आरोपी नोएडा के शीर्ष अधिकारियों रामशंकर सिंह व आलोक सिंह चौहान की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इन दोनों के खिलाफ सीबीआइ कोर्ट द्वारा जारी पेशी के लिए जमानती वारंट पर हस्तक्षेप करने से उच्च न्यायालय ने इंकार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनील अंबवानी तथा न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता की खंडपीठ ने दिया है। याचियों का कहना था कि वे लोक सेवक हैं इसलिए उन्हें दंप्रसं की धारा 197 के तहत संरक्षण प्राप्त है। न्यायालय ने कहा है कि धारा 197 के तहत संरक्षण सरकारी कंपनियों या पब्लिक अंडरटेकिंग, भले ही वे अनुच्छेद 12 के अंतर्गत राज्य हो, को नहीं मिलेगा। ऐसे में इनके विरुद्ध जांच के बाद कायम आपराधिक मुकदमें पर पारित आदेश विधिसम्मत है।उल्लेखनीय है कि मानव सेवा समिति व अन्य की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने प्लाट आवंटन घोटाले की जांच सीबीआइ को सौंपी। सीबीआइ ने घोटाले का खुलासा करते हुए नोएडा के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ आइपीसी की धारा 120बी, 201, 420, 477ए के अंतर्गत मुकदमा कायम किया। इस पर नोएडा ने आवंटन रद कर दिया था। सीबीआइ ने नोएडा के अधिकारियों, यूपीडेस्को व राज्य सरकार के अधिकारियों पर आवंटन में हेराफेरी का आरोप लगाया, जिसका विचार सीबीसीआइडी कोर्ट कर रही है।

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