Saturday, July 30, 2011

महाभियोग से डरे दिनकरन का इस्तीफानई दिल्ली,

भ्रष्टाचार के आरोपों में महाभियोग की कार्यवाही का सामना कर रहे सिक्किम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पीडी दिनकरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जस्टिस दिनकरन ने शुक्रवार शाम राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को अपना इस्तीफा भेजा। पद से इस्तीफा देने के बाद उन्हें पद से हटाने के लिए राज्यसभा में लंबित महाभियोग की कार्यवाही स्वत: समाप्त हो जाएगी। जस्टिस दिनकरन विवादों में तब आए जब 2009 में उनका नाम सुप्रीम कोर्ट में प्रोन्नति के लिए भेजा गया और बार के कुछ वकीलों ने उन पर सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप लगाते हुए प्रोन्नति का विरोध किया। अंत में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में उनकी प्रोन्नति की संस्तुति वापस ले ली गई। बाद में जस्टिस दिनकरन के खिलाफ जांच हुई। जस्टिस दिनकरन को पद से हटाने के लिए सांसदों ने हस्ताक्षर कर राज्यसभा में महाभियोग का प्रस्ताव दिया जिसे सभापति ने स्वीकार कर लिया। फिलहाल राज्यसभा सभापति द्वारा नियुक्ति तीन सदस्यीय जांच समिति जस्टिस दिनकरन पर लगे आरोपों की जांच कर रही है। इस समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश आफताब आलम हैं। हाल ही में दिनकरन की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी राव को समिति के पद से हटाने और उनकी जगह दूसरे कानूनविद को रखने का निर्देश दिया था। यह आदेश दिनकरन की ओर से राव पर पक्षपाती होने की आशंका जताये जाने पर दिया गया था। हालांकि कोर्ट ने राव पर लगाए गए दिनकरन के आरोप नहीं स्वीकार किए थे और जस्टिस दिनकरन का अर्जी दाखिल करने को देरी करने का हथकंडा बताया था। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीश को सिर्फ संसद में महाभियोग के जरिये ही पद से हटाया जा सकता है। इसके अलावा अनुच्छेद 217 (1)(ए) के मुताबिक हाईकोर्ट के न्यायाधीश अपने हस्तलेख में राष्ट्रपति को संबोधित कर पद से इस्तीफा दे सकते हैं।

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