2जी घोटाले को लेकर संसद से सड़क तक सरकार को कठघरे में खड़ा करने के बाद भाजपा ने अब सीबीआइ का दरवाजा भी खटखटा दिया है। इसके पीछे उसका एक मात्र उद्देश्य गृह मंत्री पी चिदंबरम को भी जांच के दायरे में लाना है, जिनको वह स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए हरी झंडी देने के लिए जिम्मेदार मानती है। चिदंबरम उस समय वित्तमंत्री थे। पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सीबीआइ निदेशक को एक पत्र सौंपकर उनसे इस मामले में चिदंबरम की भूमिका की जांच की भी मांग की। सीबीआइ निदेशक से किसी राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात असामान्य बात मानी जाती है। सीबीआइ निदेशक भी आम तौर पर राजनीतिक नेताओं से नहीं मिलते हैं, लेकिन इस मामले में निदेशक एपी सिंह न उन्हें मिलने का मौका दिया और ज्ञापन भी लिया। भाजपा नेताओं ने सीबीआइ निदेशक से मांग की है कि वह 2जी घोटाले की जांच के दायरे में उस समय वित्त मंत्री रहे चिदंबरम की भूमिका की भी जांच करे, जिसके चलते इतना बड़ा घोटाला हुआ। भाजपा नेताओं ने कहा कि वित्त मंत्रालय की नामंजूरी से यह घोटाला रोका जा सकता था। चिदंबरम भी पहले इस तरह से स्पेक्ट्रम आबंटन के पक्ष में नहीं थे, लेकिन बाद में उनके द्वारा इसकी मंजूरी देना, उनकी भूमिका पर सवाल खड़े करता है। जावडेकर ने कहा कि संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) की रिपोर्ट व नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट भी चिदंबरम की भूमिका पर सवाल उठा चुकी है। भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेज व अन्य सबूत सीबीआइ निदेशक को सौंपते हुए कहा कि इन्हें देखते हुए सीबीआइ इस तरह की जांच कर सकती है। सीबीआइ को पूरे स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच करनी चाहिए। इस मामले में पूर्व संचार मंत्री ए राजा जेल में हैं, लेकिन चिदंबरम बाहर हैं। जावडेकर ने कहा कि 2003 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फैसला किया था कि स्पेक्ट्रम आवंटन व कीमतों के निर्धारण का काम संचार व वित्त मंत्रालय मिल कर करेंगे, इसलिए इस मामले में दोनों मंत्री बराबरी के जिम्मेदार हैं।

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