Saturday, July 30, 2011

अन्ना को पागल बताने वाली चिट्ठी सरकारी वेबसाइट पर

नई दिल्ली लोकपाल पर जनता की राय मांगना सरकार के लिए सिर्फ एक राजनीतिक शोशेबाजी से ज्यादा कुछ नहीं। खुद वित्त मंत्री ने देश भर के लोगों के सुझाव आमंत्रित करते हुए कहा था कि कैबिनेट के पास मसौदा भेजे जाने से पहले इन पर विचार किया जाएगा। हजारों लोगों ने अपने सुझाव भेजे भी, लेकिन इन पर विचार करना या इन्हें पढ़ना तो दूर, अब तक इनकी गिनती तक नहीं की गई है। उल्टे सरकारी वेबसाइट पर अन्ना हजारे को पागल बताने वाली एक चिट्ठी जरूर डाली गई है। इस चिट्ठी में अन्ना को सांप्रदायिक सिद्ध किया गया है। इसके अतिरिक्त कहा गया है कि दलित, पिछड़े वर्गो के साथ-साथ मुस्लिम समाज को इसलिए भ्रष्टाचार की लड़ाई से अलग रहना चाहिए, क्योंकि देश में कभी कोई मुसलमान प्रधानमंत्री नहीं बनेगा। इस चिट्ठी में और भी तमाम तर्कहीन बातें लिखी हैं, लेकिन उसे पर्याप्त महत्व देते हुए वेबसाइट पर स्थान दिया गया है। देश भर से 15 हजार से ज्यादा लोगों ने ई-मेल या पत्र के माध्यम से लोकपाल के संबंध में अपनी राय दी। इनमें से अधिकांश उस ई-मेल पर भेजे गए जो वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के आदेश के बाद इस विभाग ने तैयार किया था। इन ई-मेल में कोई दो सौ ई-मेल का प्रिंट लेकर उन्हें एक फाइल में लगा दिया गया, पर अब तक इस पर कोई विचार नहीं किया गया है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अनौपचारिक बातचीत में कहते हैं, यह काम डीओपीटी की निगरानी शाखा के सेक्शन-4 को दिया गया है, जिसमें आधा दर्जन कर्मचारी भी नहीं। इनके पास रूटीन की जिम्मेदारियां भी हैं। इसलिए अब तक सिर्फ कुछ ई-मेल के प्रिंट लिए जा सके हैं। उन्हें अब तक पढ़ना या उनका सारांश तैयार करना भी संभव नहीं हुआ है। वित्त मंत्री ने जनता से मिलने वाले सुझावों को वेबसाइट पर भी डालने को कहा था, मगर अब तक कुल 22 सुझाव ही सरकार को डीओपीटी की वेबसाइट पर डालने लायक लगे। इनमें अन्ना हजारे को पागल और माओवादी बताने वाली चिट्ठी भी शामिल है।

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