नई दिल्ली आने वाले दिनों में टीनू जोशी व अरविंद जोशी जैसे भ्रष्ट आइएएस या अन्य अफसरों के लिए अपनी अकूत संपत्ति को जब्ती से बचाना मुश्किल हो जाएगा। वर्षो चले वाद विवाद के बाद केंद्र सरकार ने आखिरकार भ्रष्ट अफसरों की परिसंपत्तियां जब्त किए जाने के रास्ते में आने वाली कानूनी अड़चनें खत्म करने का फैसला किया है। इसके तहत भ्रष्टाचार निरोधक कानून 1988 में संशोधन कर एक नया चैप्टर जोड़ा जाएगा। बिहार इस तरह का कानून बनाने के साथ ही कुछ की संपत्ति जब्त कर चुकी है। कई राज्य ऐसे कानून को बनाने की तैयारी में हैं। सूत्रों के मुताबिक, भ्रष्टाचार निरोधक कानून सरकारी बाबुओं द्वारा किये जाने वाले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बनाया गया है, लेकिन कानून के ही कुछ प्रावधान भ्रष्ट अफसरों की परिसंपत्तियां जब्त करने के रास्ते में बाधा हैं। लिहाजा अब इस कानून में एक नया अध्याय जोड़ा जाएगा, जिसके तहत जांच प्रक्रिया के दौरान ही भ्रष्ट तरीके से अर्जित धन व परिसंपत्तियों को जब्त करने का अधिकार जांच एजेंसियों को मिल जाएगा। मौजूदा भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत, जब तक न्यायालय में यह बात साबित नहीं होती है तब तक परिसंपत्तियों को जब्त नहीं किया जाता। कार्मिक विभाग संशोधन के जरिए विधेयक में इस बारे में नया चैप्टर जोड़ने की तैयारी कर रहा है। सरकार की मंशा आगामी सत्र में ही इस विधेयक को पेश करने की है। सूत्रों के मुताबिक, इस संशोधन के बाद गलत तरीके से अर्जित आय के मामले में दोषी व्यक्तियों की परिसंपत्तियां जब्त करने के लिए दो कानून हो जाएंगे। अभी प्रीवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत काला धन अर्जित करने वालों की परिसंपत्तियों को जब्त किया जाता है। बताते चलें कि केंद्र सरकार की बाबा रामदेव के साथ जब काले धन पर रोक लगाने को लेकर चर्चा हुई थी, तब सरकार की तरफ से यह आश्वासन दिया गया था कि वह सरकारी स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए और सख्त कदम उठाएगी। वैसे यूपीए-एक के कार्यकाल के दौरान भी इस विधेयक में संशोधन की तैयारी की गई थी, पर कई वजहों से इसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका था। हाल ही में सुप्रीमकोर्ट ने भी एक फैसले में इस कानून में संशोधन की बात उठा चुका है।
Monday, July 18, 2011
भ्रष्ट अफसरों की संपत्ति जब्त करेगा केंद्र
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