Saturday, July 9, 2011

कालेधन पर कोर्ट की पहलकदमी

विदेशी बैंकों में हमारे देश का कितना धन जमा है, इसका कोई आंकड़ा नहीं है। अनुमानित आंकड़े से कई गुना अधिक कालाधन भी हो सकता है। एसआईटी को कालेधन का आंकड़ा जुटाने में मुश्किलातों का पहाड़ लांघना होगा। चूंकि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी का गठन हुआ है और सभी गुप्तचर एजेसियां और सरकार के संबंधित विभाग एसआईटी के अधीन होंगे, इसलिए उम्मीद है कि अनुकूल नतीजा निकलेगा।लेधन पर सरकार की नीतियां पर्दा डालने की ही रही हैं। सो, अब सत्ता उसे इस तथ्य पर जरूर आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर बार-बार सुप्रीम कोर्ट से ठोकर खाने के बावजूद कालेधन की सत्यता आम जनता के बीच रखने की जगह किंतु-परंतु क्यों किया जाता रहा। पचास हजार करोड़ से भी ज्यादा कालेधन का अभियुक्त हसन अली को पांच साल तक संरक्षण क्यों मिला? हसन अली के खिलाफ जांच में प्रशासनिक और नीतिगत हीलाहवाली क्यों और किस मकसद से हुई। बहरहाल, कालेधन के पर्दाफाश और वापसी की राह अभी भी आसान नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अवरोध और जटिलताएं बेशक बड़ी मुश्किलात हैं। लेकिन इनसे टकराने और इन्हें दूर करने की जिम्मेदारी भी तो सरकार की ही है। अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पहल करते हुए कालेधन पर विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया है तो इसका निहितार्थ क्या यह नहीं है कि कोर्ट ने इस मामले में सरकार के तौर-तरीकों और ईमानदारी पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है? कोर्ट ने एसआईटी का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश वीपी जीवन रेड्डी को बनाया है, जबकि एक अन्य पूर्व न्यायामूति एमवी शाह को एसआईटी का उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया है। एसआईटी के तहत गुप्तचर एजेंसियों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह उन कालेधन के दोषियों को उजागर करे, जिनके नाम जर्मनी ने उपलब्ध कराए हैं और जिनके खिलाफ जांच पूरी हो गई है। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने कई सुनवाइयों में बार-बार मतंव्य दिया था कि कालेधनार्थियों के नाम उजागर किए जाएं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस मंतव्य की अवहेलना हुई। तर्क दिया गया कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के कारण सरकार के हाथ बंधे हुए हैं और समझौते तोड़ने पर भारतीय कूटनीति को परेशानी होगी। जबकि जर्मनी ने अपने एक बयान में कहा था कि जिन लोगों को भारत सरकार और अदालत दोषी मानती है, उन लोगों के कालेधन के खुलासे में कोई अवरोध नहीं है। इसीलिए हवा में ये खबरें तैर रही हैं कि कई ऐसे कालेधनार्थी हैं, जिनके पास राजनेताओं के पैसे हैं।

गौरतलब है कि भारत के बाद सर्वाधिक कालाधन अमेरिकी नागरिकों का जमा है। लेकिन अमेरिका को जैसे ही भेदिए से कालेधन की सूची मिली, वैसे ही उसने कूटनीतिक शक्ति दिखाई और कालाधन जमा करने वाले बैंकों की गोपनीयता की हेकड़ी तोड़ी। कालाधन जमा करने वाले बैंकों का तर्क था कि गोपनीयता के अधिकार से वे बंधे हुए हैं। इस पर अमेरिका ने कालाधन जमा करने वाले बैंकों और देशों पर प्रतिबंध लगाने और उन्हें आतंकवादी की श्रेणी में डालने की धमकी दी। संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद के चार्टर के अनुसार, कालाधन जमा करने और उस धन से अमान्य गतिविधियां चलाने पर पाबंदी है। अमेरिका की धमकी पर कालाधन जमा करने वाले बैंकों और देशों की हेकड़ी निकल गई और अमेरिका ने अपना अरबों डालर का कालाधन तो वापस लिया ही, दोषियों को कानून का पाठ भी पढ़ाया। भारत को भी असल में अमेरिका जैसी कूटनीतिक शक्ति दिखानी चाहिए। अगर कालाधन रखने वाले बैंक और देशों ने आनाकानी की तो इस मामले को संयुक्त राष्ट्रसंघ में ले जाना चाहिए। वास्तविकता तो यही है कि भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई अन्य देश भी इस समस्या से हलकान हैं, इसलिए यह मुद्दा उठाने पर भारत को दुनिया भर के जनमत का भी साथ मिलेगा, बशर्ते हमारी कूटनीति अमेरिका जैसी सख्ती दिखाने के लिए तैयार हो।

विदेशी बैंकों में हमारे देश का कितना धन जमा है, इसका कोई आंकड़ा नहीं है। अनुमानित आंकड़े से कई गुना अधिक कालाधन भी हो सकता है। एसआईटी को कालेधन का आंकड़ा जुटाने में मुश्किलातों का पहाड़ लांघना होगा। चूंकि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी का गठन हुआ है और सभी गुप्तचर एजेसियां और सरकार के संबंधित विभाग एसआईटी के अधीन होंगे, इसलिए उम्मीद है कि अनुकूल नतीजा निकलेगा। अगर कालेधन को वापस लाने में हम सफल होते हैं तो हमारी अर्थव्यवस्था को निश्चय ही एक बड़ा सपोर्ट मिलेगा। गौरतलब है कि भ्रष्टाचार के माध्यम से जमा किए गए कालेधन से कई यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्थाएं गुलजार हो रही हैं। यूरोपीय देशों ने बैंकों को इसीलिए गोपनीयता का संवैधानिक-कानूनी कवच पहना रखा है, ताकि कालाधन उनके यहां पहुंचता रहे और उनकी अर्थव्यवस्था कालेधन से गुलजार होती रहे। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआईटी के गठन से जनता में यह विश्वास जागा है कि कालेधन की वापसी हो सकती है और उस पैसे से हमारी कई समस्याएं दूर हो सकती हैं।

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