| विदेशी बैंकों में हमारे देश का कितना धन जमा है, इसका कोई आंकड़ा नहीं है। अनुमानित आंकड़े से कई गुना अधिक कालाधन भी हो सकता है। एसआईटी को कालेधन का आंकड़ा जुटाने में मुश्किलातों का पहाड़ लांघना होगा। चूंकि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी का गठन हुआ है और सभी गुप्तचर एजेसियां और सरकार के संबंधित विभाग एसआईटी के अधीन होंगे, इसलिए उम्मीद है कि अनुकूल नतीजा निकलेगा।लेधन पर सरकार की नीतियां पर्दा डालने की ही रही हैं। सो, अब सत्ता उसे इस तथ्य पर जरूर आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर बार-बार सुप्रीम कोर्ट से ठोकर खाने के बावजूद कालेधन की सत्यता आम जनता के बीच रखने की जगह किंतु-परंतु क्यों किया जाता रहा। पचास हजार करोड़ से भी ज्यादा कालेधन का अभियुक्त हसन अली को पांच साल तक संरक्षण क्यों मिला? हसन अली के खिलाफ जांच में प्रशासनिक और नीतिगत हीलाहवाली क्यों और किस मकसद से हुई। बहरहाल, कालेधन के पर्दाफाश और वापसी की राह अभी भी आसान नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अवरोध और जटिलताएं बेशक बड़ी मुश्किलात हैं। लेकिन इनसे टकराने और इन्हें दूर करने की जिम्मेदारी भी तो सरकार की ही है। अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पहल करते हुए कालेधन पर विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया है तो इसका निहितार्थ क्या यह नहीं है कि कोर्ट ने इस मामले में सरकार के तौर-तरीकों और ईमानदारी पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है? कोर्ट ने एसआईटी का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश वीपी जीवन रेड्डी को बनाया है, जबकि एक अन्य पूर्व न्यायामूति एमवी शाह को एसआईटी का उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया है। एसआईटी के तहत गुप्तचर एजेंसियों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह उन कालेधन के दोषियों को उजागर करे, जिनके नाम जर्मनी ने उपलब्ध कराए हैं और जिनके खिलाफ जांच पूरी हो गई है। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने कई सुनवाइयों में बार-बार मतंव्य दिया था कि कालेधनार्थियों के नाम उजागर किए जाएं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस मंतव्य की अवहेलना हुई। तर्क दिया गया कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के कारण सरकार के हाथ बंधे हुए हैं और समझौते तोड़ने पर भारतीय कूटनीति को परेशानी होगी। जबकि जर्मनी ने अपने एक बयान में कहा था कि जिन लोगों को भारत सरकार और अदालत दोषी मानती है, उन लोगों के कालेधन के खुलासे में कोई अवरोध नहीं है। इसीलिए हवा में ये खबरें तैर रही हैं कि कई ऐसे कालेधनार्थी हैं, जिनके पास राजनेताओं के पैसे हैं। |
Saturday, July 9, 2011
कालेधन पर कोर्ट की पहलकदमी
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