Thursday, July 28, 2011

कैग की निगरानी में फलेगी-फूलेगी मनरेगा

जयपुर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) समेत ग्रामीण विकास योजनाओं में राज्य सरकारों को दिए जाने वाले धन के उपयोग पर निगरानी को असरदार बनाएगा। मंत्रालय इन योजनाओं पर नियंत्रक महालेखापरीक्षक (कैग) की निगरानी व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रहा है। राजस्थान यात्रा पर आए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने बताया कि रक्षा मंत्रालय के बाद ग्रामीण विकास मंत्रालय का सबसे ज्यादा बजट है। पिछले वित्तीय वर्ष में मंत्रालय ने नौ विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 90 हजार करोड़ रुपए राज्य सरकारों को बांटे है जिसमें राजस्थान को छह हजार करोड़ रुपए आवंटित किए गए। उन्होंने बताया कि मंत्रालय की भूमिका अब तक वित्त मंत्रालय से मिली राशि को राज्य सरकारों को बांटने की रही है। अब मंत्रालय बांटी गई इस राशि का उपयोग सही हुआ हैं या नहीं, इस पर भी विशेष ध्यान देगा। उन्होंने बताया कि सीएजी से नियमित जांच की व्यवस्था लागू करने के लिए बातचीत चल रही है। वहीं नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ के माओवादी प्रभावित इलाकों में हालात अत्यंत गंभीर करार देते हुए ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि उनका मंत्रालय प्रभावित लोगों और प्रशासन के बीच विश्वास की कमी दूर करने की रणनीति पर काम करेगा। रमेश ने नक्सलियों से प्रभावित 60 जिलों पर ध्यान केंद्रित करने का वादा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार योजनाओं में प्रशासनिक खर्च छह फीसदी से बढ़ाने की जिलाधिकारियों की मांग पर जल्द फैसला लेगी। नक्सल प्रभावित जिलों के कलेक्टरों ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सीमेंट कंकरीट रोड सभी जगहों पर बनाने की मंजूरी मांगी है। नक्सलियों के आतंक से पीडि़तों को भी इंदिरा आवास योजना का पात्र बनाने का सुझाव दिया है। साथ ही बैंकिंग, पोस्ट ऑफिस, अस्पताल और अन्य जरूरी सुविधाओं की बेहतरी पर जोर दिया

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